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Saudi Arab और UAE के बीच और बढ़ा तनाव?

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Saudi Arab और UAE के बीच और बढ़ा तनाव?

SAUDI ARAB-UAE -TENTION: मध्य पूर्व में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है ईरान की आक्रामक रणनीति। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसका जवाब ईरान ने सिर्फ सीधे हमलों से नहीं बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर करके दिया।

ईरान ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सीधे अमेरिका से टकराने के बजाय उसके सहयोगी देशों—खासतौर पर सऊदी अरब और यूएई—को निशाना बनाना शुरू किया। मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए ईरान ने इन देशों के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और सैन्य बेस को टारगेट किया, जिससे पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता फैल गई।

यही नहीं, ईरान ने साफ चेतावनी दी कि अगर सऊदी अरब और यूएई ने अमेरिका का साथ दिया या अपने एयरबेस इस्तेमाल करने दिए, तो उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस चेतावनी ने इन दोनों देशों के बीच भी तनाव बढ़ा दिया क्योंकि दोनों की रणनीति अब अलग-अलग दिखने लगी है।
अमेरिका में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। वजह साफ है—ईरान सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी जवाब दे रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण या बाधा डालना वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

इसी बीच सबसे बड़ा झटका तब लगा जब यूएई ने OPEC जैसे बड़े तेल संगठन को छोड़ने का फैसला किया। यह कदम सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी माना जा रहा है। इससे सऊदी अरब की पकड़ कमजोर होती दिख रही है और दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई अब अपनी स्वतंत्र नीति अपनाना चाहता है, जबकि सऊदी अरब पारंपरिक तरीके से तेल बाजार को नियंत्रित करना चाहता है। इस अंतर ने दोनों के रिश्तों में खटास बढ़ा दी है।
दूसरी तरफ, ईरान की रणनीति और भी खतरनाक होती जा रही है। वह सिर्फ सैन्य हमले ही नहीं कर रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बना रहा है। ईरान का मकसद है कि यह युद्ध इतना महंगा हो जाए कि अमेरिका खुद पीछे हटने को मजबूर हो जाए।

खाड़ी देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब सुरक्षा की है। लगातार हमलों की वजह से उनके एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हो रहे हैं और उन्हें अपनी रक्षा के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। साथ ही, इन देशों के बीच एकजुटता भी कमजोर पड़ती दिख रही है, जिससे ईरान को और फायदा मिल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। वैश्विक तेल बाजार, शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति सब प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिका के लिए यह सिर्फ एक युद्ध नहीं बल्कि उसकी वैश्विक नेतृत्व की परीक्षा बन चुका है।
अंत में कहा जा सकता है कि ईरान की चाल ने न सिर्फ अमेरिका को असहज कर दिया है बल्कि सऊदी अरब और यूएई जैसे सहयोगी देशों के बीच भी दरार पैदा कर दी है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले समय में यह संघर्ष और भी बड़ा रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

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