
तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला, सरकार गठन पर फसा पेंच!
CHENNAI DESK NEWS:तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अगली सरकार किसकी बनने जा रही है। चुनावी माहौल गरम है, दावे बड़े-बड़े किए जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा सबसे ज्यादा तेज है, वो यह कि इस बार ना तो विजय थलापति की TVK अपने दम पर सरकार बना पाएगी और ना ही पारंपरिक दिग्गज दल DMK और AIADMK आसानी से सत्ता तक पहुंच पाएंगे। राज्य की राजनीति इस बार पूरी तरह त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प होती नजर आ रही है।
फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय थलापति ने अपनी पार्टी TVK के जरिए युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच जबरदस्त पकड़ बनाई है। उनकी रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या भीड़ वोटों में बदल पाएगी? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि TVK फिलहाल “किंगमेकर” की भूमिका में ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है, न कि सीधे सत्ता हासिल करने की स्थिति में। दूसरी ओर DMK अपनी सरकार की योजनाओं और कल्याणकारी राजनीति के दम पर वापसी का दावा कर रही है, लेकिन सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोप पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वहीं AIADMK भी लगातार जमीन पर मेहनत कर रही है, मगर नेतृत्व संकट और संगठनात्मक कमजोरी उसके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है।
ऐसे में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता फिलहाल नजर नहीं आ रहा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार तमिलनाडु में गठबंधन की राजनीति सबसे अहम भूमिका निभा सकती है। अगर चुनाव परिणाम बिखरे हुए आते हैं, तो छोटे दल और निर्दलीय विधायक सरकार गठन में निर्णायक साबित हो सकते हैं। भाजपा भी दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार रणनीति बना रही है और पर्दे के पीछे कई राजनीतिक समीकरणों पर काम चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव नतीजों के बाद तमिलनाडु में बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि सभी दल अभी से संभावित गठबंधनों के दरवाजे खुले रखे हुए हैं। विजय थलापति की लोकप्रियता ने चुनाव को रोमांचक जरूर बना दिया है, लेकिन सरकार बनाने के लिए सिर्फ स्टारडम नहीं बल्कि मजबूत संगठन, बूथ मैनेजमेंट और ठोस राजनीतिक समीकरण की जरूरत होती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि तमिलनाडु की जनता इस बार किसे सत्ता की चाबी सौंपती है और क्या राज्य में एक बार फिर गठबंधन युग की वापसी होती है या फिर कोई पार्टी आखिरी वक्त में बाजी मार लेती है