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Trump के हाथ बड़ा खजाना “व्हाइट गोल्ड”

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Trump के हाथ बड़ा खजाना “व्हाइट गोल्ड”

WASHINGTON DC:अमेरिका को आखिरकार मिल गया है वो खजाना जिसे दुनिया “व्हाइट गोल्ड” यानी सफेद सोना कहती है। इलेक्ट्रिक कारों, मोबाइल बैटरियों और आधुनिक टेक्नोलॉजी की दुनिया में जिस खनिज की सबसे ज्यादा मांग है, अब उसका विशाल भंडार अमेरिका के हाथ लग चुका है। एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में मिले इस बड़े लिथियम रिजर्व ने पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस भंडार की अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर आंकी जा रही है और दावा किया जा रहा है कि यह अमेरिका की सैकड़ों साल की लिथियम जरूरत को पूरा कर सकता है।

ऐसे समय में जब दुनिया इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की ओर तेजी से बढ़ रही है और चीन लिथियम सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है, अमेरिका की यह खोज किसी रणनीतिक हथियार से कम नहीं मानी जा रही। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका अब बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और EV सेक्टर में चीन को सीधी चुनौती दे सकता है। डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी यह खबर बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि चीन के साथ जारी ट्रेड वॉर और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका को एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक सहारा मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में लिथियम वही भूमिका निभा सकता है जो कभी तेल निभाता था। यही वजह है कि दुनिया के बड़े देश अब लिथियम संसाधनों पर कब्जा मजबूत करने की दौड़ में जुटे हुए हैं। अमेरिका लंबे समय से चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा था, खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स और बैटरी सप्लाई चेन को लेकर

। अब इस नई खोज के बाद अमेरिका घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर बैटरी उत्पादन बढ़ा सकता है, जिससे इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें भी कम हो सकती हैं और अमेरिकी कंपनियों को भारी फायदा मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ चीन के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि अभी तक वैश्विक लिथियम प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन में उसका दबदबा रहा है। अगर अमेरिका अपने नए भंडार का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करता है, तो वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ कमजोर पड़ सकती है। इतना ही नहीं, इससे अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी और भविष्य की टेक्नोलॉजी रेस में उसे बड़ी बढ़त मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि सिर्फ लिथियम मिलने से सबकुछ आसान नहीं हो जाएगा, क्योंकि खनन, पर्यावरणीय मंजूरी और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना बड़ी चुनौती होगी। लेकिन इसके बावजूद यह खोज अमेरिका के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका इस “व्हाइट गोल्ड” का इस्तेमाल कैसे करता है और क्या यह खोज आने वाले वर्षों में वैश्विक ताकत के संतुलन को बदल देगी।

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