
गाय पर योगी का बड़ा हमला , बिजनौर से उठी नई सियासी बहस
UTTAR PRADESH LIVE: बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने गाय को लेकर बड़ा बयान देते हुए उन मौलानाओं पर तीखा हमला बोला जिन्होंने हाल ही में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गाय हिंदू समाज के लिए माता के समान है और उसे सम्मान देने के लिए किसी सरकारी घोषणा या प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गाय का स्थान सदियों से पूजनीय रहा है और उसकी महत्ता किसी राजनीतिक या प्रशासनिक फैसले की मोहताज नहीं है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग गाय के महत्व को समझे बिना केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि भारतीय संस्कृति में गाय को जीवन, कृषि, अर्थव्यवस्था और आस्था का आधार माना गया है। मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक और भावनात्मक विषयों को उछाल रहे हैं। वहीं Asaduddin Owaisi की पार्टी AIMIM ने भी योगी आदित्यनाथ के बयान पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि
अगर कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग की है तो उसे सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक हमले का विषय बनाया जाना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री को प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ने केवल हिंदू समाज की भावनाओं को व्यक्त किया है और गाय के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान है। इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है, जहां एक वर्ग मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन कर रहा है तो दूसरा वर्ग इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि इसमें धर्म, राजनीति और सामाजिक भावनाएं तीनों जुड़ी हुई हैं। फिलहाल बिजनौर से उठे इस बयान ने प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस को जन्म दे दिया है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर क्या रणनीति अपनाते हैं।