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दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के 8 लोग जिंदा जले

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दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के 8 लोग ज़िदा जले

INDIA LIVE:दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन इन मौतों के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। एक हंसता-खेलता परिवार, जो अपने बीमार बुजुर्ग पिता से मिलने गुरुग्राम से दिल्ली आया था, कुछ ही घंटों में पूरी तरह तबाह हो गया। अग्रवाल परिवार के आठ सदस्य एक साथ आग की लपटों में घिर गए और जिंदा जल गए। बताया जा रहा है कि परिवार के बुजुर्ग सदस्य साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें देखने के लिए परिवार के लोग दिल्ली पहुंचे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि अपनों का हालचाल लेने आया यह परिवार खुद एक ऐसे हादसे का शिकार हो जाएगा,

जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। होटल के बाहर आज भी एक कार खड़ी है। वही कार, जिसमें बैठकर यह परिवार गुरुग्राम से दिल्ली आया था। हादसे के बाद कई लोगों ने उस कार को लावारिस समझा, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा दर्दनाक है। वह कार अपने मालिकों का इंतजार कर रही है, उन लोगों का जो अब कभी वापस नहीं आएंगे। कार की बंद खिड़कियां और उसके आसपास पसरा सन्नाटा उस त्रासदी की गवाही दे रहे हैं जिसने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब आग ने होटल को अपनी चपेट में लिया तो कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे भवन में फैल गया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे, लेकिन कई लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। अग्रवाल परिवार के आठ सदस्य भी उन्हीं लोगों में शामिल थे जो आग और धुएं के बीच फंस गए। देखते ही देखते खुशियों से भरा एक परिवार मौत की आगोश में समा गया। आज परिवार के रिश्तेदारों और परिचितों का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग पिता को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि जिन अपनों के इंतजार में वे थे, वे अब कभी उनके सामने नहीं आ पाएंगे। यह हादसा सिर्फ आंकड़ों में दर्ज 21 मौतों की कहानी नहीं है, बल्कि उन सपनों, रिश्तों और उम्मीदों के खत्म हो जाने की कहानी है जो एक पल में राख हो गए। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर होटल में सुरक्षा के क्या इंतजाम थे,

आग इतनी तेजी से कैसे फैली और लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय क्यों नहीं मिल सका। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, उनके लिए कोई भी कार्रवाई या जांच उनके अपनों को वापस नहीं

ला सकती। मालवीय नगर की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सुरक्षा नियमों में छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

 आज होटल के बाहर खड़ी वह कार, खामोश होकर एक ऐसे परिवार की कहानी सुना रही है जो अपने बुजुर्ग पिता से मिलने आया था, लेकिन खुद हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया। एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है और हर आंख में सिर्फ एक सवाल है—क्या यह हादसा रोका जा सकता था?

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