
सिरसी सादात में 12वें मोहर्रम पर भावभीनी आंखों से निकला जुलूस, दहकते अंगारों पर मातम कर दी इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत
संभल/सिरसी। कस्बा सिरसी सादात में 12वें मोहर्रम के अवसर पर अलम और जुल्जनाह का पारंपरिक जुलूस पूरी अकीदत और गमगीन माहौल के बीच निकाला गया। रविवार शाम को शुरू हुआ यह जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ देर शाम कर्बला मोहल्ला सादात पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान अंजुमन जुल्फेकारे हैदरी, अंजुमन गुलदस्ते हैदरी, अंजुमन हाशमी, अंजुमन हैदरी, अंजुमन गुलजार-ए-हुसैनी, अंजुमन पंजतनी और अंजुमन हुसैनी ने दर्दभरी नौहाख्वानी कर पूरे माहौल को सोगवार कर दिया। अकीदतमंदों ने सीना-ज़नी कर इमाम हुसैन की शहादत का पुरसा पेश किया।

दहकते अंगारों पर मातम का खौफनाक मंजर
जुलूस का मुख्य आकर्षण मस्जिद मोहल्ला सादात के सामने आयोजित ‘आग पर मातम’ रहा। जुल्जनाह की ज़ियारत के बाद हुसैनी दस्ते के जांबाज हाथों में अलम थामे ‘या हुसैन… या हुसैन…’ की सदाएं बुलंद करते हुए दहकते अंगारों पर उतर गए। मान्यता है कि कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत के बाद यजीदी फौज ने उनके खेमों में आग लगा दी थी, उसी दर्दनाक मंजर की याद में अंजुमन जुल्फेकारे हैदरी द्वारा इस विशेष मातम का आयोजन किया जाता है।

इसके बाद कर्बला मोहल्ला सादात पर ‘बनी असद’ का ऐतिहासिक मंजर पेश किया गया, जिसे देखकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। जुलूस के समापन पर आयोजित मजलिस को मौलाना मंज़ूर आलम जाफरी ने खिताब किया, जिसमें उन्होंने कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों पर रोशनी डाली।