
लखनऊ की गोमती में अब नहीं गिरेगी गंदगी: योगी सरकार का मेगा एक्शन प्लान।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली गोमती नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। लंबे समय से गोमती में गिर रहे सीवेज और गंदे पानी को रोकने के लिए अब नालों की टैपिंग, सीवेज डायवर्जन और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP लगाने की योजना पर काम किया जाएगा।

इस पूरी कवायद का मकसद गोमती नदी में सीधे पहुंच रहे अनट्रीटेड सीवेज को रोकना और नालों के पानी को STP तक पहुंचाकर उसका ट्रीटमेंट करना है। यह योजना नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
ड्रोन सर्वे में सामने आई बड़ी तस्वीर
गोमती में गिरने वाले नालों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ड्रोन सर्वे कराया गया। सर्वे के दौरान ऐसे 12 नए नालों की पहचान हुई, जिनका पहले नगर निगम के रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं था। पहले 33 नालों की जानकारी थी, लेकिन नए नालों को शामिल करने के बाद कुल संख्या 45 नालों तक पहुंच गई है।
इन नालों से निकलने वाला सीवेज गोमती नदी के प्रदूषण की बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 28 अनटैप्ड या आंशिक रूप से टैप्ड नालों से लगभग 260 एमएलडी सीवेज निकल रहा है। अब इस सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोककर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने की तैयारी है।
45 नालों पर होगी कार्रवाई
एक्शन प्लान के तहत नालों को अलग-अलग तरीके से मैनेज किया जाएगा। जहां जरूरत होगी वहां नालों की टैपिंग की जाएगी, जबकि कुछ नालों के पानी का फ्लो डायवर्ट करके उसे STP तक पहुंचाया जाएगा।
यानी आने वाले समय में कोशिश यह होगी कि नाले का गंदा पानी सीधे गोमती में न पहुंचे, बल्कि पहले उसका उपचार हो और उसके बाद ही पानी को आगे छोड़ा जाए।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ नालों से निकलने वाले लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज की टैपिंग पहले ही की जा चुकी है, जबकि पांच नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। सबसे बड़ी चुनौती बचे हुए अनटैप्ड और आंशिक रूप से टैप्ड नालों की है।
बनेंगे कई नए STP
गोमती को प्रदूषण मुक्त करने की योजना में कई नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित किए गए हैं। योजना के तहत बसंतकुंज में 160 एमएलडी, जियामऊ में 150 एमएलडी तथा वजीरगंज और नीलमथा में 65-65 एमएलडी क्षमता के STP प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता वाले मॉड्यूलर STP भी प्रस्तावित किए गए हैं। इन प्लांटों का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले सीवेज को ट्रीट करके गोमती पर प्रदूषण का दबाव कम करना है।
पुराने STP भी होंगे अपग्रेड
सरकार की योजना सिर्फ नए STP बनाने तक सीमित नहीं है। पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता और तकनीक को भी बेहतर किया जाएगा।
योजना में भरवारा और दौलतगंज STP के अपग्रेडेशन को शामिल किया गया है। इसके साथ ही मस्तेमऊ में नेचर-बेस्ड तकनीक के इस्तेमाल की योजना है।
वहीं बरीकलां और लोनियापुरवा STP से नालों को जोड़ने की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 39 एमएलडी क्षमता वाले एक STP का निर्माण नवंबर 2024 में पूरा हो चुका है।
लखनऊ से रोज निकलता है भारी मात्रा में सीवेज
लखनऊ की तेजी से बढ़ती आबादी के साथ सीवेज की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 45.56 लाख की आबादी से प्रतिदिन लगभग 880 एमएलडी सीवेज निकलता है।
ऐसे में शहर के सीवेज नेटवर्क और STP की क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए गोमती नदी में जाने वाले सीवेज के रास्ते को बंद करने और उसे वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट करने की योजना बनाई जा रही है।
NMCG को भेजी गई रिपोर्ट
गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त करने की इस विस्तृत योजना की रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को भेजी जा चुकी है। अब योजना को आगे बढ़ाने और प्रस्तावित कार्यों को जमीन पर उतारने की दिशा में कदम उठाए जाने हैं।
क्यों जरूरी है गोमती की सफाई?
गोमती सिर्फ लखनऊ से गुजरने वाली नदी नहीं है, बल्कि शहर के पर्यावरण और जल-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबे समय से नालों का सीवेज नदी में पहुंचने के कारण पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं।
अगर नालों के सीधे डिस्चार्ज को प्रभावी तरीके से रोका जाता है और STP में सीवेज का सही उपचार होता है तो इसका सीधा फायदा नदी के पानी की गुणवत्ता, जलीय जीवन और आसपास के पर्यावरण को मिल सकता है।
अब असली चुनौती अमल की
सरकार ने योजना तैयार कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल इसके प्रभावी क्रियान्वयन का है। नालों की टैपिंग, पाइपलाइन और पंपिंग सिस्टम, STP निर्माण तथा पुराने प्लांटों के अपग्रेडेशन का काम समय पर पूरा करना जरूरी होगा।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि टैप किए गए नालों का पानी दोबारा किसी दूसरे रास्ते से गोमती में न पहुंचे और STP लगातार अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार काम करें।
कुल मिलाकर लखनऊ की गोमती को साफ करने की दिशा में 45 नालों पर केंद्रित यह योजना एक बड़ा कदम है। अगर इसे तय समयसीमा और प्रभावी निगरानी के साथ लागू किया गया, तो गोमती में सीधे गिरने वाले गंदे पानी को काफी हद तक रोकने में मदद मिल सकती है।