
लखनऊ में ई-रिक्शा पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, बढ़ती संख्या से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त!
ALLAHABAD HIGHCOURT NEWS: 80 हजार ई-रिक्शा ने बढ़ाया यातायात का दबाव, हाईकोर्ट ने कहा- सरकार निष्क्रिय होकर नहीं बैठ सकती; नीति बनाने पर जोर, 10 सितंबर को अगली सुनवाई
राजधानी लखनऊ की सड़कों पर लगातार बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या अब यातायात व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए शहर में तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शा की संख्या पर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि लखनऊ में करीब 80 हजार ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनके संचालन और संख्या को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी नीति स्पष्ट रूप से सामने नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा के संचालन से शहर की यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है। अदालत का कहना है कि सरकार इस स्थिति को लेकर निष्क्रिय होकर नहीं बैठ सकती। बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार को ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
बढ़ती संख्या बनी ट्रैफिक के लिए चुनौती
लखनऊ में ई-रिक्शा लोगों के लिए सस्ता और सुविधाजनक परिवहन साधन बन चुके हैं। लेकिन इनकी संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के साथ इनके संचालन को व्यवस्थित करने की चुनौती भी बढ़ गई है। प्रमुख चौराहों, बाजारों और संकरी सड़कों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पहुंचने से यातायात की रफ्तार प्रभावित होती है।
पुराने लखनऊ में चौक, चौपटिया, अमीनाबाद, हुसैनाबाद, कैपल रोड और बालागंज चौराहा जैसे इलाकों में समस्या ज्यादा दिखाई देती है। यहां पहले से ही पैदल राहगीरों और दूसरे वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में ई-रिक्शा द्वारा सड़क पर सवारी बैठाने और उतारने से कई बार यातायात बाधित होने की स्थिति बन जाती है।
प्रतिबंधित मार्गों पर भी संचालन का आरोप
राजधानी में यातायात दबाव कम करने के लिए पहले कई प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। शुरुआत में पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की ओर से कार्रवाई भी की गई, लेकिन बाद में सख्ती कमजोर पड़ने के आरोप लगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ ई-रिक्शा चालक निर्धारित रूट की अनदेखी करते हुए प्रतिबंधित मार्गों पर भी पहुंच जाते हैं। इसके अलावा कुछ वाहनों की नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं होने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में लोगों की मांग है कि परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस नियमित रूप से अभियान चलाकर वाहनों की जांच करे।
पूर्व में भी लागू हुई थी प्रतिबंध की व्यवस्था
ई-रिक्शा से बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए पूर्व पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर के कार्यकाल में शहर के कई प्रमुख मार्गों पर इनके संचालन को नियंत्रित करने की व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करना और आम जनता को जाम से राहत दिलाना था।
हालांकि, समय बीतने के साथ कार्रवाई में ढिलाई की शिकायतें सामने आने लगीं और कई प्रतिबंधित मार्गों पर दोबारा ई-रिक्शा दिखाई देने लगे। इससे सवाल उठने लगा कि जब नियम और प्रतिबंध तय हैं तो उनका प्रभावी पालन क्यों नहीं कराया जा रहा।
अब प्रभावी नीति की जरूरत
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजधानी में ई-रिक्शा की संख्या और संचालन को लेकर सरकार किस तरह की नीति तैयार करती है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें ई-रिक्शा की संख्या, रूट, परमिट, पार्किंग, स्टॉपेज और यातायात नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए।
ई-रिक्शा आम लोगों के लिए जरूरी परिवहन साधन हैं, लेकिन इनका संचालन ऐसा होना चाहिए जिससे सुविधा के साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित न हो। इसके लिए नियमित चेकिंग और नियमों का सख्ती से पालन कराना बेहद जरूरी है।
मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होनी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि अगली सुनवाई में सरकार की ओर से ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए क्या ठोस कदम और नीति अदालत के सामने रखी जाती है।