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भारत में अब जाति धर्म आधारति शिक्षा, सरकारी मदरसे को बंद कर संस्कृत स्कूल, विधानसभा में पेश होगा विधेयक

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असम  : के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सोमवार को असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम 1995 को निरस्त करने के लिए एक विधेयक पेश करेंगे। विशेष रूप से असम विधानसभा का तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। शीतकालीन सत्र के शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए असम के शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक बार बिल पारित होने के बाद राज्य सरकार द्वारा मदरसा चलाने की प्रथा समाप्त हो जाएगी। स्वतंत्रता पूर्व असम में मुस्लिम लीग सरकार द्वारा इनको शुरू किया गया था। अक्टूबर में सरमा ने घोषणा की थी कि असम में मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा और सभी सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदल दिया जाएगा। उन्होंने आगे स्पष्ट किया था कि सरकार का निजी मदरसों को बंद करने का इरादा नहीं है।

सरमा के पास वित्त और स्वास्थ्य विभाग भी हैं, उन्‍होंने भी घोषणा की थी कि असम सरकार भी संस्कृत स्कूल भी बंद होंगे। हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, सरकार का निर्णय मदरसों पर रिसर्च के बाद लिया गया है। उन्‍होंने कहा, “एक गुवाहटी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर द्वारा किया गया सर्वेक्षण, जो एक मुस्लिम है। उन्‍होंने पाया कि मदरसों के अधिकांश छात्रों के माता-पिता और अभिभावक इस तथ्य से अवगत नहीं हैं कि उनके बच्चों को नियमित विषय नहीं पढ़ाया जाता है, लेकिन उन्हें ज्यादातर धर्मशास्त्र पढ़ाया जाता है।” सरमा ने 17 अक्टूबर को मीडिया को बताया, “असम में सरकार द्वारा संचालित मदरसे या तो नियमित स्कूलों में बदल दिए जाएंगे या उन्हें बंद कर दिया जाएगा। अगले महीने सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद शिक्षकों को सामान्य स्कूलों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि एकरूपता लाने के लिए सरकारी खजाने की कीमत पर कुरान पढ़ाना जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। असम मंत्रिमंडल ने 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में अपनी बैठक में सभी सरकारी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया।

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