
बहराइच : सुनने और कान की देखभाल को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3 मार्च को जनपद के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो पर विश्व श्रवण दिवस मनाया गया । इसी क्रम में शहर के मेडिकल कालेज एवं सम्बद्ध जिला चिकित्सालय के सभागार कक्ष में विश्व श्रवण दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीएमएस डॉ डीके सिंह ने कहा कि गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य कानों में होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है। उन्होंने बताया कि बहरापन तथा श्रवण हानि ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे दुनियाभर में लाखों लोग पीड़ित हैं। इस वर्ष हियरिंग केयर फॉर ऑल- जांच, पुनर्वास, संवाद, थीम पर विश्व श्रवण दिवस मनाया जा रहा है

वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ० एस० के० वर्मा ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की मानें तो वर्ष 2050 तक इन समस्याओं से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़कर 900 मिलियन तक पहुंचने की आशंका है। यही नहीं दुनिया भर में विभिन्न माध्यमों के जरिए बढ़ने वाले शोर तथा उससे संबंधित प्रदूषण के चलते 12 से 35 वर्ष की आयु वाले लगभग 1.1 बिलियन लोगों में श्रवण हानि या बहरेपन जैसी समस्या उत्पन्न होने की आशंका भी जताई जा रही है। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए बहरेपन और श्रवण हानि के प्रति लोगों में जन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दुनिया भर में 3 मार्च को ‘विश्व श्रवण दिवस’ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में सुनने व बोलने में कठिनाई होने पर तत्काल चिकित्सीय सलाह लेने पर गूंगेपन कि समस्या से बचा जा सकता है

वहीं श्रवण हानि से बचने के लिए जहां तक हो सके किसी भी प्रकार की तीव्र ध्वनि से बचना चाहिए। गाड़ियों की आवाज, कार्यक्षेत्र में मशीनों की आवाज तथा लंबे समय तक कानों में मोबाइल के इयरप्लग या ईयर मफ पहनने से यह समस्या हो सकती है। इस अवसर पर एनसीडी क्लीनिक के डॉ० पी तिवारी, मेंटल हेल्थ के डॉ० विजित जायसवाल, डॉ० एस० के त्रिपाठी, फिजियोथेरेपी स्पेशलिस्ट डॉ० रियाजुल हक़, एफएलसी विवेक श्रीवास्तव, जिला सलाहकार पुनीत शर्मा, लैब टेक्नीशियन सन्तोष सिंह, नर्सिंग ऑफिसर बृज प्रकाश श्रीवास्तव व प्रवीण कुमार, सीमा कुमारी, राजकुमार महतो, सुमित आदि मौजूद रहे
इन लक्षणों को समझकर करवाएं इलाज :
सुनने में आ रही कठिनाई
कान में बार-बार भनभनाहट
अक्सर कान में दर्द रहना
कई बार कान का बहना
कसी बात को बार- बार पूंछना
बच्चों को सुनने व बोलने में कठिनाई
इस बात का भी रखें ध्या न :
गर्भावस्था में चिकित्सक की सलाह के बिना दवा लेने से नवजात बच्चों में श्रवण दोष हो सकता है
गलसुआ और खसरा जैसे रोग बच्चों में बहरापन का कारण बन सकते हैं।
अप्रशिक्षित व्यक्तियों अथवा सड़क के किनारे नीम-हकीम से कान साफ कराने से बचें
कान से रिसाव या रक्त या बार-बार दर्द का होना गंभीर है, चिकित्सीय सलाह लें
कान में नुकीली चीज न डालें