
तकनीकी खराबी के चलते स्टार्ट नहीं हो पा रही थी बस
होली सिर पर, चालक-परिचालक परेशान कैसे पूरा करें टारगेट
लखनऊ : आगामी प्रमुख पर्व होली को लेकर भले ही परिवहन निगम के उच्च प्रबंधन ने कागजी तौर पर प्रदेश में सुविधाजनक परिवहन सेवा के तहत बसों का रोडमैप तैयार कर लिया हो, मगर इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अभी भी विभिन्न डिपो व तमाम रूटों की ऐसी सैकड़ों बसें हैं जो तकनीकी रूप से चालू हालत में नहीं है पर उसे किसी तरह सड़कों पर घसीटा जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को राजधानी के सबसे बडे बस स्टेशन यानी आलमबाग बस टर्मिनल के अंदर देखने को मिला। जब अयोध्या डिपो की एक साधारण बस इसलिये स्टार्ट नहीं हो पा रही थी क्योंकि उसकी बैट्री बोल गई थी
ऐसे में चालक व परिचालक सहित वहां पर कार्यरत अन्य रोडवेज कर्मियों और यहां तक कि उसमें सवार रहे यात्रियों ने उक्त रोडवेज बस को धक्का देना शुरू किया। गौर हो कि लखनऊ में यह केवल एक दिन की घटना नहीं है, एक दिन पहले ही ऐसे ही हरदोई डिपो की एक जनरल बस जिसमें कि ठीक-ठाक सवारियां भी बैठी थीं, वो सड़क पर चलते-चलते अचानक डालीगंज चौराहे जैसे भीड़-भाड़ वाले अति व्यस्त चौराहे पर जाकर रुक गई। फिर क्या था, वहां पर यह घटना होते ही कुछ ही देर में चारों तरफ चौराहे पर भीषण टैÑफिक जाम की स्थिति बन गई। यही नहीं पास में ही केजीएमयू जैसा चिकित्सा संस्थान होने के चलते एक तरफ से जा रही एम्बुलेंस भी फंस गई। यह दृश्य देखकर चौराहे पर कार्यरत टैÑफिक पुलिस टीम को पसीने आ गये और वो खुद रोडवेज बस को धक्का देने के लिये अन्य आमजनों के साथ डट गये। अब सवाल यह उठता है कि जब राजधानी में ही रोडवेज बसों का यह पुरसाहाल है
तो ऐसे में सुदूर व अन्य ग्रामीण व कस्बाई रूटों पर संचालित रोडवेज बसों का क्या हाल होता होगा। इस रूट पर चलने वाले कई चालकों व परिचालकों ने दबे जुबां बताया कि भइया, होली सिर पर है और किसी तरह तय लोड फैक्टर के आंकडेÞ हो छूते रहना है नहीं तो हमारी नौकरी पर लात पड़ते देर नहीं लगेगी। आगे कहना रहा कि डिपो में बसों की तकनीकी खराबी को लेकर कई बार कहा जाता है कि मगर हर बार यही जवाब मिलता है कि अभी सामान नहीं है, इसी से काम चलाओ।