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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रशिक्षित हुए प्रशिक्षक

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बहराइच : जनपद में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए के एमडीए अभियान चलाया जाना है। इसके लिए सीएमओ सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश कुमार सिंह ने बताया कि फायलेरिया जानलेवा नही है लेकिन दीर्घकालीन विकलांगता में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने बताया फाइलेरिया का प्रभाव भारत के 257 जिले तथा उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में है इनमें अपना बहराइच भी शामिल है। बताया कि इस बीमारी के खात्मे के लिए हर वर्ष एमडीए अभियान चलाया जाता है । जिसमें स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाती है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए पाथ संस्था के नोडल अधिकारी व प्रशिक्षक डॉ उदित मोहन ने फाइलेरिया के लक्षण ,पहचान व प्रबंधन की विस्तृत जानकारी देते हुए अभियान के दौरान सभी पात्र व्यक्तियों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने के लिए माइक्रोप्लानिंग पर चर्चा की। डॉ उदित ने बताया कि अभियान के दौरान इस बात का खास ख्याल रखना होगा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने सामने ही पात्र व्यक्ति को दवा खिलाएं। किसी भी सूरत में दवा घर ले जाने के लिए नही दी जाएगी।

दो स्तंभों पर आधारित है फायलेरिया उन्मूलन की रणनीति

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व कार्यक्रम के नोडल डॉ जयंत कुमार ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन की रणनीति दो बातों पर आधारित है , पहला एमडीए अभियान जिसमें पात्र व्यक्तियों को फायलेरिया रोधी दवा वर्ष में एक बार खिलाई जाती है। ताकि उन्हें फाइलेरिया न हो । दूसरा फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्तियों की पहचान कर बीमारी का प्रबंधन व उन्हें विकलांग होने से बचाना है। इसके लिए फाइलेरिया मरीजों व उनके रिश्तेदारों को प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वह बीमारी का प्रबंधन कर सकें। इसके अलावा हाइड्रोसील वाले मरीजों की सर्जरी जिला व ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में की जाती है इस मौके पर जिला मलेरिया अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित जनपद के समस्त सीएचसी अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, बीपीएम, बीसीपीएम व डीआईओ मौजूद रहे।

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