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मठ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मनाई विवेकानन्द जयन्ती

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लखनऊ। निराला नगर स्थित रामकृष्ण मठ में युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की 160 वीं जयंती पर गुरूवार को आयोजन किया। इसके साथ रामकृष्ण मिशन के 125वें स्थापना दिवस और राष्ट्रीय युवा दिवस वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रजज्वलित कर किया गया। वहीं यूटयूब चैनल रामकृष्ण मठ लखनऊ के माध्यम से सीधा प्रसारण भी किया । जिसमें बडी संख्या में विभिन्न स्कूलो के छात्र व छात्राओं ने प्रतिभाग किया। ज्ञात हो कि वर्ष 1985 में भारत सरकार ने स्वामी विवेकानन्द के जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया गया। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संन्यासीयों द्वारा किया गया। उद्घाटन गीत रामकृष्ण मठ, लखनऊ के स्वामी इष्टकृपानन्द व अन्य द्वारा गाया गया। विवेकानन्द युवा संघ लखनऊ के समर नाथ निगम के नेतृत्व में स्वामी का स्वदेश मंत्र तथा अमृत मंत्र का पाठ समवेत स्वर में किया गया। इस अवसर पर नागरिक जागरूकता कार्यक्रम लखनऊ क्षेत्र के हरि ओम राय, ने स्वागतीय भाषण दिया। ओम प्रकाश द्वारा स्वामी विवेकानन्द द्वारा रचित एक कविता का पाठ हुआ। स्वामी मुक्तिनाथानंद ने मंच पर बिराजमान अतिथियों का आभार व्यक्त कियाद्ध इसके तत्पश्चात कार्यक्रम में चयनित युवा प्रतिभागियों में विवेकानन्द युवा केन्द्र के सिदार्थ सिंह, सौरभ शर्मा, समरनाथ निगम, आयुष श्रीवास्तव द्वारा पाठ का किया गया। कार्यक्रम की अतिथि डॉ इंदु सुभाष, संस्थापक और एमडी, गाइड, भारतीय महिलाओं के उत्थान के लिए स्वामी विवेकानन्द संदेश विषय पर युवाओं को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने व्यक्तित्व को विकसित करने के साथ-साथ भारत माता की सेवा करने के लिए स्वामी विवेकानन्द की सलाह का पालन करना चाहिए। मुख्य अतिथि भानु प्रताप सिंह द्वारा श्रोताओं को राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व पर युवाओं को सम्बोधित किया तथा उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने चरित्र के निर्माण के लिए ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो सफल जीवन प्राप्त करने के लिए लंबा रास्ता तय करे। वहीं स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने संबोधित करते हुए कहा कि युवावों को जीवन में सफल होने के लिए आत्मविश्वास, शारीरिक क्षमता, मानसिक एकाग्रता तथा दूसरों के प्रति सेवा की भावना रखनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने युवाओं को अपने आप में विश्वास विकसित करने का आशीर्वाद दिया, और कहा कि मांसपेशिया लोहे की तरह व मानदंड स्टील की तरह बनाए। युवाओं को अपने विचार को सही दिशा में विकसित करने के लिए स्वामी विवेकानन्दजी के कार्यों को भी लक्ष्य बनाना चाहिए।

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