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ट्रंप को फिलिस्तीनयों का करारा जवाब।

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लोगों को मिस्र और जॉर्डन में शरण लेने की सलाह दी थी और यह भी कहा था कि मिस्र और जॉर्डन समेत सभी अरब देशों को इन लोगों को अपनाना चाहिए ताकि युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके. जॉर्डन, मिस्र और फिलिस्तीन ने ट्रम्प के इस बयान पर उन्हें करारा जवाब दिया है. फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद आंदोलन ने ट्रम्प के हालिया बयानों की कड़ी निंदा की है और एक बयान में मिस्र और जॉर्डन सहित सभी देशों से “ट्रम्प की योजना” को अस्वीकार करने का आह्वान किया है. फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद आंदोलन ने कहा कि इससे पहले भी अमेरिकी कई योजना विफल हो चुकी है. यह योजना भी विफल हो जाएगी. उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनियों के अधिकारों और अस्तित्व के विपरीत है, एक मकामी ने कहा कि हमें पश्चिमी शहर खान यूनिस में स्थानांतरित होने के लिए मजबूर किया गया था. हम अपना भाग्य और हम क्या चाहते हैं, इसका फैसला खुद करेंगे. यह जमीन हमारी है और यह हमारे पूर्वजों की संपत्ति रही है. हम इसे कभी नहीं छोड़ेंगे, सिवाय इसके कि हमें यहां से मृत अवस्था में ले जाया जाए. हमास ने कहा कि गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी लोगों को सिर्फ अपनी जमीन के लिए 15 महीने तक मौत और विनाश सहना पड़ा है. उन्होंने ट्रम्प के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह पुनर्निर्माण की आड़ में ऐसे किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि हम गाजा को पहले से भी बेहतर बना लेंगे, बशर्ते गाजा से घेराबंदी हटा ली जाए. गौरतलब है कि 15 महीने के इस युद्ध के दौरान गाजा के ज्यादातर निवासियों को स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होना पड़ा और गाजा की ज्यादातर इमारतें नष्ट हो गई हैं. संयुक्त राष्ट्र ने पहले अनुमान लगाया था कि गाजा में 60 फीसद इमारतें या तो पूरी तरह नष्ट हो गई हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, तथा उनके पुनर्निर्माण में दशकों लग सकते हैं.

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