
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच जिग्नेश मेवानी को आया गुस्सा
Atrocities के मामले में Rate of conviction के राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े देखें, तो वो 30-35% है, लेकिन गुजरात में ये आंकड़ा केवल 3 से 5% है। यानि दलितों के साथ अत्याचार करने वाले 100 में से 95% लोग छूट जाते हैं। मैं चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर संज्ञान लें और गुजरात की सरकार से सवाल पूछें। कुछ साल पहले गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले के थामगढ़ तहसील में 24, 21 और 19 साल के दलित लड़के जो atrocities की शिकायत दर्ज करवाने जा रहे थे,

उन पर AK-47 से गोलियां दागी गईं, जैसे वो आतंकवादी हों। उनका दोष सिर्फ इतना था कि वो उस टीम का हिस्सा था, जो शिकायत दर्ज करवाने के लिए पुलिस थाने जा रहे थे। ऐसी कई घटनाएं हैं, जहां लोगों ने पुलिस में शिकायत कर संभावना जताई कि उनकी हत्या हो सकती है, लेकिन उस शिकायत पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है और उनकी हत्या हो जाती है। गुजरात की BJP सरकार और पुलिस का ऐसा रवैया हो गया है कि दलित मरते हैं, तो मरें, हमको फर्क नहीं पड़ता