
लखनऊ पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब (स.) के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की याद में पहली मोहर्रम को निकलने वाले शाही जुलूस में शामिल होने के लिए मोम व अभ्रक से बनने वाली जरीह बनाने का कार्य बहुत तेजी से हो रहा है। छोटे इमामबाड़े में तैयार की जा रही जरीहयों में आकर्षक डिजाइन बनाये जा रहे है।

पहली मोहर्रम को ऐतिहासिक शाही जरीह का जुलूस शाम पांच बजे बड़े इमामबाड़े से निकलेगा जो छोटे इमामबाड़े तक जायेगा। जुलूस में मोम की जरीह मुख्य आकर्षण का केन्द्र होगी। कारीगर नसीम अली ने बताया कि लगभग तीन लाख दस हजार रुपये की लागत से बन रही मोम व अभ्रक की जरीह। इन दो जरीहों के अतिरिक्त शाही मेहदी के जुलूस के लिए दो मेहदी, 24 फुलवारी, इमामबाड़ा शाहनजफ के लिए एक लाल व एक हरी जरीह जो 17 फिट ऊँची और आठ फिट चौड़ी है। इसके अलावा 12 अराइश भी शामिल है जिसको 16 कारीगर पिछले दो महीने से बना रहे हैं।

इस काम में पुरुष व महिलाएं लगी है। यह मोम की जरीह डबल छतरी लगाकर बाइस फिट उंची और दस फिट चौड़ी है। इसमें करीब एक कुन्ताल पैतालीस किलो मोम लगा है। जरीह में करीब दस तरह के मोम के डिजाइन बनाकर लगाये जा रहे है। जिसमें माहली 1000, स्टार 1000, चांद 500, मिर्च पती 1000 तीन तरह के फूल 4000 और अन्य डिजाइन शामिल है। इसके अलावा इसमें चार गुम्बद छोटे, एक बड़ा गुम्नबाद और दो छतरी भी बन रही है। इस बार मोम के आठ मीनर है जिसमें हरे व लाल रंग के अलावा सफेद रंग का भी मोम लगाया जा रहा है।

बड़े गुम्बद पर दो फिट का ताज भी बन रहा है। ऊपर से गुलाब, कागज व शीशे का सेहरा भी लगेगा। शाही जुलूस में 17 फिट ऊंची और आठ फिट चौड़ी अभ्रक को जरीह भी शामिल होगी। जरीह को कागज से बने रंगबिरंगी फूलों से सजाया जाता है। इसके अलावा जरीह को सफेद चमकीली झालर से सजाया गय जरीह को बहराइच कस्बा जरवल के कारीगर वसीम अली, साबिर, मीकाइल, इंसान अली, मो0 शादाब, नसीम, मुश्ताक, सकीना और फिज्जा दो महीने से बना रहे है।