
बीबीएयू में महिला एवं बाल स्वास्थ्य पर योग कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने योग-आयुर्वेद को बताया सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार
बीबीएयू में महिला एवं बाल स्वास्थ्य पर योग कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने योग-आयुर्वेद को बताया सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में चल रहे योग महाकुंभ के अंतर्गत मंगलवार को योग विभाग और योग वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में महिला एवं बाल स्वास्थ्य विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में महिला और बालकों के स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न शारीरिक और मानसिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार रखे।कार्यक्रम की अध्यक्षता योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं संज्ञानात्मक अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. बी.सी. यादव ने की। मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, बंगला बाजार, लखनऊ की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमा गुप्ता उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन योग वेलनेस सेंटर के योग विशेषज्ञ डॉ. सागर सैनी ने किया।प्रो. बी.सी. यादव ने कहा कि योग और आयुर्वेद दोनों ही भारतीय जीवन दर्शन के अभिन्न अंग हैं। यदि व्यक्ति इन्हें नियमित रूप से जीवन में अपनाए तो न केवल रोगों से दूर रह सकता है, बल्कि दीर्घकालीन स्वास्थ्य भी सुनिश्चित कर सकता है।
मुख्य वक्ता डॉ. अंशुमा गुप्ता ने कहा कि अधिकांश रोगों की जड़ हमारी बिगड़ी दिनचर्या में छिपी होती है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के लिए सुबह जल्दी उठने और नियमित दिनचर्या का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी औषधि का सेवन बिना चिकित्सकीय परामर्श के न किया जाए, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है और औषधियों का प्रभाव उसी पर निर्भर करता है।
योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने कहा कि महिलाएं परिवार की रीढ़ होती हैं और बच्चे देश का भविष्य। इन दोनों वर्गों का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन दुर्भाग्यवश वे अपने स्वास्थ्य के प्रति कम जागरूक रहते हैं। यह कार्यशाला इसी जागरूकता को बढ़ाने का प्रयास है।योग वेलनेस सेंटर के समन्वयक प्रो. शरद सोनकर ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक और समग्र शैली है, जो मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखने में सहायक है।डॉ. नरेंद्र सिंह ने कहा कि शरीर में जल की कमी गंभीर बीमारियों जैसे यूटीआई को जन्म देती है। उन्होंने बताया कि योग और आयुर्वेद एक-दूसरे के पूरक हैं और मिलकर स्वास्थ्य रक्षा की अद्भुत प्रणाली बनाते हैं।कार्यक्रम का समापन करते हुए डॉ. सागर सैनी ने कहा कि योग और आयुर्वेद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब इन्हें समन्वयित रूप से अपनाया जाए, तो व्यक्ति संपूर्ण स्वास्थ्य रूपी धन प्राप्त कर सकता है।कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नरेंद्र सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, योग साधक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
