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उत्तर प्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए पंचायतीराज विभाग और आईआईटी कानपुर के बीच एमओयू हस्ताक्षरित

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उत्तर प्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए पंचायतीराज विभाग और आईआईटी कानपुर के बीच एमओयू हस्ताक्षरित

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को और अधिक सशक्त, सक्षम और दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आज पंचायतीराज विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के बीच नेतृत्व एवं क्षमता विकास कार्यक्रम को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया गया। यह एमओयू पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर की उपस्थिति में उनके कार्यालय कक्ष में संपन्न हुआ।पंचायतीराज विभाग की ओर से निदेशक अमित कुमार सिंह और आईआईटी कानपुर की ओर से प्रोफेसर डॉ. तरुण गुप्ता ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश की पंचायतों को मजबूती देने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “लागत की चिंता नहीं, कार्य की गुणवत्ता की चिंता की जाए।” उन्होंने जोर दिया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधी आबादी यानी महिलाओं की भी भरपूर भागीदारी सुनिश्चित की जाए और चयन में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।राजभर ने यह भी कहा कि यह संतोषजनक है कि अब तक जो प्रशिक्षण अन्य राज्यों में भेजकर कराया जाता था, वह अब उत्तर प्रदेश में ही शुरू हो रहा है। उन्होंने अच्छे कार्य करने वाले ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत सदस्यों को सम्मानित करने की भी बात कही।प्रमुख सचिव पंचायतीराज अनिल कुमार ने कहा कि पंचायतों को प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी रूप से मजबूत किए बिना योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है। उन्होंने आशा जताई कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से पंचायतें समेकित और डिजिटल विकास की दिशा में एक मिसाल कायम करेंगी।निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम से ग्राम पंचायतों की योजना निर्माण क्षमता, डिजिटल दक्षता और पारदर्शी शासन व्यवस्था में गुणात्मक सुधार होगा। उन्होंने कहा कि यह एमओयू उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पंचायत सशक्तिकरण का मॉडल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
अवसर पर आईआईटी कानपुर के डीन प्रो. विमल कुमार, उप निदेशक पंचायतीराज मनीष कुमार सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह साझेदारी प्रदेश के ग्रामीण प्रशासन में नवाचार, दक्षता और सहभागिता की नई दिशा तय करने जा रही है।

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