
कांवड़ पर मुस्लिमों की “नो एंट्री”
Haridwar News:हरिद्वार से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ कांवड़ यात्रा शुरू होने
से पहले ही माहौल गर्मा गया है। कई साधु संतों और हिन्दू संगठनों ने मांग की है कि हरिद्वार जैसे पवित्र धार्मिक स्थल में गैर हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से रोका जाए, खासकर कांवड़ यात्रा के दौरान। उनका कहना है कि यह तीर्थस्थान केवल आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, और इसकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए कुछ सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया है।

स्वमी प्रबोधनंद गिरी, जो हिन्दू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस मांग को खुलकर रखा है। उनका कहना है कि हरिद्वार हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, जहाँ हरकी पैड़ी जैसे पवित्र घाट पर पूजा पाठ होता है, और यहां कुछ ऐसे लोग भी पहुंच रहे हैं जो आस्था के नाम पर नहीं, बल्कि शरारत और गड़बड़ी फैलाने के मकसद से आते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वह गैर हिंदुओं की पहचान सुनिश्चित करे और उन्हें हरकी पैड़ी व आस पास के इलाकों में प्रवेश से रोके।
इतना ही नहीं, इस बार कांवड़ निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ संतों ने यह मुद्दा उठाया है कि अब कांवड़ बनाने का काम उन लोगों के हाथों में जा रहा है, जो ना केवल हिंदू धर्म से नहीं हैं, बल्कि कई बार उनका उद्देश्य भी संदिग्ध हो सकता है। आरोप लगाए गए हैं कि कुछ मुस्लिम कारीगर कांवड़ बना रहे हैं, और इससे गंगाजल जैसी पवित्र चीज़ की शुद्धता पर असर पड़ सकता है। यही नहीं, कुछ संतों ने तो यह भी कह दिया कि शिवभक्तों को ऐसे कांवड़ का इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए, जो “ग़ैर हिंदुओं” द्वारा बनाए गए हों।
इन तमाम बातों को लेकर साधु संतों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कुछ मांगे रखी हैं। मांगों में ये बातें शामिल हैं — कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की पहचान की पूरी व्यवस्था की जाए, मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, और पूजा सामग्री बेचने वालों की धार्मिक पहचान भी प्रशासन द्वारा सत्यापित की जाए। संतों का कहना है कि ऐसा करना जरूरी है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इसके साथ ही एक और बात चर्चा में है — “थूक जिहाद” का मुद्दा। साधु संतों का दावा है कि हरिद्वार जैसे पवित्र स्थान पर कुछ लोग पूजा सामग्री में जानबूझकर थूक डालकर अपवित्र करने का काम कर रहे हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बात को लेकर आस्था से जुड़े लोग काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। इसी के चलते, अब वहां ये मांग उठी है कि केवल हिंदू ही पूजा से जुड़े व्यवसाय या सेवा में लगे हों।
इस मुद्दे पर प्रशासन की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन हरिद्वार पुलिस और उत्तराखंड सरकार सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर पहले से ही सतर्क हैं। खबरों के मुताबिक इस बार कांवड़ यात्रा की निगरानी के लिए ATS यानी एंटी टेरर स्क्वॉड को भी तैनात किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की आतंकी या असामाजिक गतिविधि को रोका जा सके। इसके अलावा, कुछ जगहों पर मांस और शराब की दुकानों को भी अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है, ताकि तीर्थस्थान की मर्यादा बनी रहे।
प्रशासन की तैयारी दूसरी तरफ है — जैसे जगह जगह साफ-सफाई, ट्रैफिक कंट्रोल, मेडिकल सुविधाएं और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने का इंतजाम। लेकिन जो धार्मिक संगठन हैं, उनकी चिंता धर्म और संस्कृति को लेकर है। वे मानते हैं कि अगर अभी से सतर्कता नहीं बरती गई, तो कांवड़ यात्रा की पवित्रता पर आंच आ सकती है।
कांवड़ यात्रा सालाना होने वाली बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है, जिसमें लाखों शिवभक्त उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से पैदल चलते हुए गंगाजल लेने आते हैं। यह यात्रा शिवरात्रि से पहले होती है और सावन महीने में इसकी शुरुआत होती है। इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्था तो ज़रूरी होती ही है, लेकिन अब जब इसमें धार्मिक पहचान को लेकर विवाद बढ़ने लगे हैं, तो मामला संवेदनशील बन गया है।
यह बात सच है कि हरिद्वार एक धार्मिक स्थल है, लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश भी है। ऐसे में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग संविधान के दायरे में कहां तक जायज मानी जा सकती है, यह एक बड़ा सवाल है। साथ ही, कांवड़ जैसी धार्मिक वस्तु को कौन बनाए — यह फैसला क्या केवल धर्म के आधार पर किया जा सकता है? यह भी सोचने की बात है।
फिलहाल, मामला गरमाया हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। क्या साधु संतों की मांगों को माना जाएगा या नहीं? क्या गैर हिंदुओं को वाकई हरिद्वार के कुछ इलाकों में आने से रोका जाएगा? और सबसे अहम बात — क्या इस धार्मिक यात्रा का माहौल शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण बना रहेगा?