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उत्तर प्रदेश में पीएमजीएसवाई सड़कों के निर्माण में नई तकनीक से लागत में बड़ी बचत: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों की प्रशंसा की

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उत्तर प्रदेश में पीएमजीएसवाई सड़कों के निर्माण में नई तकनीक से लागत में बड़ी बचत: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों की प्रशंसा की

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत सड़कों के निर्माण में थर्मल नाइट्रोजन स्प्रे (थ्नसस क्मचजी त्मबसंउंजपवद – थ्क्त्) तकनीक को अपनाने और इससे होने वाली लागत में कमी पर कार्य में लगे सभी अधिकारियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल सड़कों को अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक बनाती है, बल्कि निर्माण लागत में भी महत्वपूर्ण कमी लाई जा रही है। विश्लेषण में पाया गया है कि इस तकनीक से लगभग प्रति घन मीटर एक हजार रुपये की बचत होगी।पूर्व में एफडीआर बेस तकनीक के तहत प्रति घन मीटर सड़क की दर 3760 रुपये निर्धारित थी, जिसे अब नए विश्लेषण के अनुसार 2784 रुपये प्रति घन मीटर किया गया है। इस प्रस्ताव को राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण द्वारा उप मुख्यमंत्री की सहमति मिली है। इससे पीएमजीएसवाई के तहत बनाई जाने वाली सड़कों की लागत में और अधिक कमी आएगी, जिससे बचत की गई राशि से और ग्रामीण सड़कों का निर्माण तथा उन पर सुविधाओं का विकास किया जा सकेगा।शुक्रवार को अपने कालिदास मार्ग स्थित कैम्प कार्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। बैठक में बताया गया कि थ्नसस तकनीक पुराने सड़क ढांचे का पुनः उपयोग कर सड़क को मजबूत बनाती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण भी होता है। अधिकारियों ने बताया कि एफडीआर तकनीक से पीएमजीएसवाई की एक किलोमीटर सड़क (5.5 मीटर चौड़ी) का निर्माण लगभग 96 लाख रुपये में होता था, अब इसे लगभग 82 लाख रुपये में बनाया जा सकेगा। यानी प्रति किलोमीटर लगभग 13 लाख 75 हजार रुपये की बचत होगी।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि गांवों की समृद्धि प्रदेश की प्रगति की नींव है और ग्राम विकास ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण, संवेदनशीलता और सेवा भाव से काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के साथ गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि बिना ग्रामीण विकास के समग्र विकास संभव नहीं है और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता लाना आवश्यक है ताकि लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य सराहनीय है। उन्होंने निर्देश दिया कि निष्क्रिय समूहों को सक्रिय किया जाए और भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। समूहों को बैंक लिंकेज, उद्यम प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता से जोड़ा जाए। मिशन के उत्पादों के लिए स्थानीय बाजारों, हाट-बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से संपर्क सुनिश्चित किया जाए। जिलों में ऑडिट अनिवार्य कराया जाए तथा सीएलएफ का ऑडिट तत्परता से किया जाए।बैठक में अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास विभाग हिमांशु कुमार, सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग गौरी शंकर प्रियदर्शी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण अखंड प्रताप सिंह, मिशन निदेशक दीपा रंजन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के निदेशक ईशम सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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