
नेतन्याहू की गलती से धुएं में Tel Aviv !
ISRAEL NEWS: हूतियों का कहर अब इज़राइल के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हाल ही में इज़राइल के खिलाफ अपने हमलों को तेज कर दिया है।

इन हमलों में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिनमें से कई को इज़राइली डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ हमले इज़राइली सीमा के अंदर तक पहुंच गए। इन घटनाओं ने न केवल इज़राइल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि नेतन्याहू सरकार की नीतियों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आक्रामक विदेश और रक्षा नीति इन हमलों का कारण बनी है। हाल के महीनों में ग़ज़ा पट्टी, पश्चिमी तट और लेबनान में इज़राइली सेना की सैन्य कार्रवाई के चलते पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ चुका है। हूतियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर फिलिस्तीनियों पर हमला नहीं रोका गया, तो वे सीधे इज़राइल को निशाना बनाएंगे। अब, जब यह चेतावनी हकीकत बन चुकी है, तो नेतन्याहू की रणनीति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तेल अवीव जैसे बड़े और पहले से सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में भी अब नागरिक दहशत में हैं। कई इलाकों में सायरन बजने लगे हैं, लोग बंकरों में छुपने को मजबूर हो रहे हैं, और आसमान में लगातार मिसाइल रोधी रक्षा प्रणाली ‘आयरन डोम’ की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है। यह स्थिति देश के भीतर डर और अनिश्चितता का माहौल बना रही है।
आलोचकों का कहना है कि नेतन्याहू ने आंतरिक राजनीतिक दबाव से बचने के लिए सैन्य मोर्चे पर आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन यह रणनीति अब उलटी पड़ती दिख रही है। ना केवल इज़राइल को बाहरी मोर्चे पर नए दुश्मनों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि देश के अंदरूनी हालात भी बिगड़ते जा रहे हैं। हज़ारों की संख्या में लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर चुके हैं और नेतृत्व की जवाबदेही मांग रहे हैं।
सवाल ये है कि क्या नेतन्याहू की नीतियां वास्तव में इज़राइल की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं, या फिर यह देश को और अधिक युद्ध, अस्थिरता और डर की ओर धकेल रही हैं? हकीकत यह है कि जब तक कूटनीति को प्राथमिकता नहीं दी जाती और सैन्य शक्ति को समाधान की एकमात्र कुंजी माना जाता रहेगा, तब तक इस आग में केवल घी ही डाला जाएगा।