
सफीपुर,उन्नाव : सफीपुर सामु0 स्वास्थ्य केंद्र जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने के निरंतर प्रयास व कार्य कर रहे हैं वही स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारी व कर्मचारियों की दुरभि संधि के चलते भ्रष्टाचार को निरंतर बढ़ावा दिया जाता रहा हमेशा से ही किसी ना किसी प्रकरण में चर्चित रहे स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर में कुछ स्वास्थ्य कर्मी ऐसे भी हैं जो अपने को जनप्रतिनिधियों का बहुत करीबी बताकर प्रभारी तथा अन्य स्टाफ कर्मियों पर कई वर्षों से रौब गाठते,दबाव बनाते चले आ रहे हैं पूर्व में प्रभारी रहे डॉ0 अजीत कुमार सिंह के कार्यकाल में मृतक आश्रित में नौकरी पाकर अपने ही ग्रह स्थानीय नगर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में ही मन मुताबिक नियुक्ति करा कर कई वर्षों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं। वहीं से शुरू हुआ इनकी चाणक्य नीति का बोल बाला आज भी सीएचसी में देखने को मिलता है राजनीति के बदलते परिप्रेक्ष्य में हर बार ये अपने को किसी न किसी नेता का करीबी बताकर सीनियर तथा जूनियर स्टाफ कर्मियों पर दबाव बनाते रहे,फर्जी तरीके से किसी ना किसी जनप्रतिनिधि के नाम का सहारा लेकर सीएचसी में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता रहा और कोई भी चिकित्सक या कर्मी इनके खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा सकता,इतना तो जलवा है इस स्वास्थ्य कर्मी का सीएचसी सफीपुर में कुछ समय पूर्व, प्रभारी पद पर तैनात रहे डॉ0 ललित कुमार के कार्यकाल में भी सीएचसी में पूर्णतया भ्रष्टाचार प्राप्त रहा स्वास्थ्य केंद्र सूत्र बताते हैं कि पूर्व में सीएचसी में मरीजों के होने वाले अल्ट्रासाउंड में भी उक्त स्वास्थ्य कर्मी को अच्छा खासा कमीशन मिलता था
इसी अल्ट्रासाउंड प्रकरण में मरीजों से पैसे उगाही को लेकर कुछ मीडिया कर्मियों द्वारा विरोध किए जाने व मरीजों के बयान रिकॉर्ड कर वीडियो बनाए जाने का मामला बहुत ही गरमाया था सूत्र बताते हैं कि उक्त बहु चर्चित स्वास्थ्य कर्मी ही ये तय करता है कि सीएचसी में आए मरीजों की जांच के पर्चे एवं मरीजों को किस जांच केंद्र पर भेजना हैं क
मीशन के चक्कर में खेला जाता है यह खेल स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदारों ने कभी भी इस कर्मचारी के पद अनुसार इससे कार्य नहीं कराया ,क्या इस कर्मचारी की पहुंच के आगे जिले के स्वास्थ्य विभाग से लेकर स्थानीय सीएचसी प्रशासन भी नतमस्तक है उपरोक्त प्रकरण का चर्चित स्वास्थ्य कर्मी प्रायः कार्य दिवस के दौरान एक चिकित्साधिकारी के कक्ष में बैठा देखा जाता है
उपरोक्त प्रकरण से संबंधित कड़ी में,कुछ वर्ष पूर्व एक क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ने इस कर्मचारी के द्वारा सीएचसी में फैलाए,गए व फैलाए जा रहे भ्रष्टाचार तथा मरीजों की शिकायतों को संज्ञान में लेकर तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी उन्नाव को इस स्वास्थ्य कर्मी को सीएचसी सफीपुर से तत्काल हटाए जाने के निर्देश दिए थे किंतु कुछ छूटभैया स्थानीय जन प्रतिनिधि के प्रतिनिधियों की मध्यस्थता से इस स्वास्थ्य कर्मी के द्वारा उक्त जनप्रतिनिधि की परिक्रमा व बिलैया दंडवत कर,स्थानांतरण को रुकवा लिया गया था स्थानीय एवं क्षेत्रीय लोगों,मरीजों तथा कभी भी सीएचसी पहुंचे जरूरतमंदों की जुबान पर प्रभारी का नाम कम सिर्फ इस कर्मचारी का ही नाम रहता है।