
लखनऊ अग्निकांड पर बुरी तरह भड़कीं डिंपल यादव
लखनऊ Live: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरानिया इलाके में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। हादसे में कई लोगों की जान चली गई, जबकि अनेक छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद जहां प्रशासन और सरकार पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इस मामले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
डिंपल यादव ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कोचिंग सेंटर में आग लगी तो दमकल विभाग की गाड़ियां समय पर मौके पर क्यों नहीं पहुंचीं? उन्होंने कहा कि यदि राहत और बचाव कार्य समय पर शुरू हो जाता तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। डिंपल यादव ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर ऐसी कौन सी चूक हुई जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना के बाद केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सपा सांसद ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनका दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए कोचिंग भेजते हैं, लेकिन जब वही स्थान हादसे का केंद्र बन जाए तो यह बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करानी चाहिए और जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उधर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उनके अनुसार यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और नियमित जांच होती तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ में इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर मामला है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
रविदास मेहरोत्रा ने मृतकों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों या कमाने वाले सदस्य को खो दिया है, उनके सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। इसलिए सरकार को केवल सांत्वना नहीं बल्कि ठोस आर्थिक सहायता भी देनी चाहिए।
उन्होंने घायलों के लिए भी 50-50 लाख रुपये की सहायता राशि की मांग की। उनका कहना है कि कई छात्र गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं और उनके इलाज में लंबा समय और भारी खर्च लग सकता है। ऐसे में सरकार को आगे आकर उनके इलाज और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। सपा नेता ने कहा कि वर्तमान में घोषित सहायता राशि इस हादसे की गंभीरता के मुकाबले काफी कम है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच होनी चाहिए। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि आग लगने के बाद शुरुआती समय में अफरा-तफरी का माहौल था और राहत कार्य में देरी हुई। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सूचना मिलते ही सभी एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया था और युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया गया।
इस बीच सरकार ने भी मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों और राहत कार्य की पूरी समीक्षा की जाए। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल लखनऊ का यह अग्निकांड पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पीड़ित परिवार अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल इस घटना को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इस भयावह हादसे के पीछे कौन सी चूक जिम्मेदार थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।