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अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में बढ़ी आपातकालीन तैयारियां: जनता से भोजन, पानी और जरूरी दवाओं का स्टॉक रखने की अपील

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अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में बढ़ी आपातकालीन तैयारियां: जनता से भोजन, पानी और जरूरी दवाओं का स्टॉक रखने की अपील

दुनिया के कई हिस्सों में बदलते सुरक्षा हालात, युद्ध की आशंकाओं, प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों और जरूरी सेवाओं में संभावित रुकावटों को देखते हुए आपातकालीन तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों में नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए अपने घरों में भोजन, पीने का पानी, जरूरी दवाइयां और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध रखें। इन तैयारियों का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि संकट के समय सरकारी सहायता पहुंचने तक उन्हें आत्मनिर्भर बनाए रखना है।

क्यों बढ़ रही हैं आपातकालीन तैयारियां?

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावट जैसी कई चुनौतियों का सामना किया है। इन घटनाओं ने सरकारों को यह समझाया है कि किसी बड़े संकट की स्थिति में भोजन, ईंधन, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा आधुनिक समय में साइबर हमले भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। यदि किसी देश की बिजली व्यवस्था, बैंकिंग नेटवर्क, संचार सेवाओं या परिवहन प्रणाली पर बड़ा साइबर हमला होता है, तो आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण कई सरकारें नागरिक सुरक्षा और व्यक्तिगत आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दे रही हैं।

ब्रिटेन ने शुरू किया तीन दिन की तैयारी का अभियान

ब्रिटेन में 22 अक्टूबर 2026 को सरकार ने ‘Be Ready’ नाम से आपातकालीन जागरूकता अभियान शुरू किया। इसके तहत लोगों को सलाह दी गई है कि वे कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिनों तक अपनी जरूरतें पूरी करने की तैयारी रखें। सरकार ने बताया कि खराब मौसम, बाढ़, जंगलों में आग, बिजली गुल होने और साइबर घटनाओं के कारण पानी, बिजली, फोन और इंटरनेट जैसी सेवाएं बाधित हो सकती हैं।

ब्रिटिश सरकार की सलाह में घरों में पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, मोबाइल चार्ज करने के लिए पावर बैंक, रेडियो और जरूरी दवाइयां रखने पर जोर दिया गया है। साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाने और जरूरतमंद पड़ोसियों की मदद करने की भी अपील की गई है।

यूरोपीय देशों में भी 72 घंटे की तैयारी पर जोर

यूरोपीय संघ ने मार्च 2025 में अपनी ‘Preparedness Union Strategy’ पेश की थी। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों, भू-राजनीतिक तनाव और संभावित सैन्य संकट जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए यूरोपीय देशों की तैयारी मजबूत करना है।

यूरोपीय आयोग ने नागरिकों को कम से कम 72 घंटे तक आत्मनिर्भर रहने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके तहत भोजन, पानी, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, रेडियो, पावर बैंक और नकदी जैसी चीजें उपलब्ध रखने की सलाह दी गई। फ्रांस, आयरलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में भी नागरिकों को आपातकालीन तैयारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

अमेरिका में भी लंबे समय से जारी है तैयारी की सलाह

अमेरिका में भी आपातकालीन तैयारी को लेकर सरकारी एजेंसियां और रेडक्रॉस लगातार लोगों को जागरूक करती रही हैं। अमेरिकी आपदा प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देशों में परिवारों को कम से कम तीन दिनों का भोजन, पानी और आवश्यक दवाइयां रखने की सलाह दी जाती है।

तूफान, बाढ़, जंगलों की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है। ऐसे में परिवारों के पास पहले से जरूरी सामान उपलब्ध होना राहत पहुंचने तक काफी मददगार साबित हो सकता है।

घरों में कौन-कौन सी चीजें रखने की सलाह?

आपातकालीन तैयारियों के तहत विशेषज्ञों की सलाह है कि हर परिवार अपनी जरूरत के हिसाब से एक छोटा इमरजेंसी किट तैयार रखे। इसमें मुख्य रूप से ये चीजें शामिल होनी चाहिए:

  1. तीन दिनों के लिए पर्याप्त पीने का पानी।

  2. चावल, दाल, बिस्कुट, ड्राई फ्रूट्स और डिब्बाबंद भोजन।

  3. नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाइयां।

  4. प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट।

  5. टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी और पावर बैंक।

  6. रेडियो और कुछ जरूरी नकदी।

  7. महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षित प्रतियां।

  8. बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों की जरूरत का सामान।

ब्रिटेन की सरकारी सलाह के अनुसार एक व्यक्ति के लिए प्रतिदिन लगभग 2.5 से 3 लीटर पीने का पानी रखने पर विचार करना चाहिए। परिवार में सदस्यों की संख्या और उनकी जरूरत के अनुसार इसका इंतजाम करना जरूरी है।

क्या दुनिया किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है?

अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में इन तैयारियों को लेकर चर्चा के बीच आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या दुनिया किसी बड़े युद्ध या वैश्विक आपातकाल की ओर बढ़ रही है? हालांकि, सरकारों की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों को किसी निश्चित युद्ध, लॉकडाउन या तत्काल बड़े संकट का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

दरअसल, सरकारें चाहती हैं कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में नागरिक घबराने के बजाय समझदारी से काम लें। प्राकृतिक आपदा हो, बिजली संकट हो या संचार व्यवस्था में रुकावट, शुरुआती 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा सामान जमा न करें और न ही बाजार में अनावश्यक खरीदारी करें। अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे जरूरी वस्तुओं का इंतजाम करें और उनकी समय-समय पर जांच करते रहें।

कुल मिलाकर, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में बढ़ती आपातकालीन तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि अब सरकारें केवल संकट आने के बाद राहत पहुंचाने पर नहीं, बल्कि संकट से पहले नागरिकों को तैयार करने पर भी ध्यान दे रही हैं।

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