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गोयला बीकेटी के प्रधानाध्यापक सुरेश जायसवाल द्वारा कक्षा 6 , 7 और 8 के लिए प्रतियोगी एवं मेधा परीक्षाओं के लिए लिखित “इतिहास” प्रश्न बैंक  का विमोचन किया|

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लखनऊ :  माननीय  बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चन्द्र द्विवेदी ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोयला बीकेटी के प्रधानाध्यापक सुरेश जायसवाल द्वारा कक्षा 6 , 7 और 8 के लिए प्रतियोगी एवं मेधा परीक्षाओं के लिए लिखित “इतिहास” प्रश्न बैंक  का विमोचन किया| इस अवसर पर माननीय विधायक संजय प्रताप जायसवाल, शिक्षक सहकारी समिति के अध्यक्ष प्रणव कुमार,  मनीष जायसवाल, महेश कुमार सिंह आदि  उपस्थित रहे
 सुरेश जायसवाल प्रधानाध्यापक होने के साथ ही एक शिक्षक नेता भी हैं लेकिन उन्होंने अपने मूल कर्तव्य का निर्वहन करते हुए शिक्षण कार्य को अनदेखा नहीं किया| श्री जायसवाल बताते हैं कि उन्हें हमेशा  इस बात का  एहसास रहा कि  बेसिक शिक्षा में अध्ययनरत निर्धन बच्चों को किस प्रकार से उन बच्चों में समक्ष  खड़े होने के इतना  काबिल बनाया जाए जिससे वह अपने समाज में एक बेहतर स्थान बना सके। मन में हमेशा से एक गूँज बनी रहती कि वह कौन सा माध्यम होगा जिससे इन बच्चों के सपनों को पंख दे सकें ।
ऐसे में जब अपनी दुविधा को पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी के समक्ष रखा और उन्होंने मेरा मार्गदर्शन करते हुए विद्यालय के बच्चों को सिल्वर जोन द्वारा आयोजित हिन्दी ओलंपियाड में प्रतिभाग कराने का सुझाव दिया। यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होती है लेकिन परिषदीय विद्यालयों की प्रतिभागिता की कल्पना किसी ने नहीं की थी।  बच्चों को प्रतिभाग कराने के लिए हिन्दी से संबंधित प्रश्नों का संकलन कर उन्हें नियमित अभ्यास कराया जिसका  प्रतिफल सकारात्मक रहा और मेरे  विद्यालय पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोयला बीकेटी लखनऊ के छात्र ने लखनऊ जनपद में प्रथम स्थान और पूरे भारत में 109 वा स्थान प्राप्त कर परिषदीय विद्यालयों का मान बढ़ाया।इस प्रतियोगिता में प्राइवेट स्कूल के बच्चे ही प्रतिभाग किया करते थे।
 इस परिणाम ने उनके  विचारों को आलम्बन प्रदान किया कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को सही  मार्गदर्शन प्रदान किया जाए तो वे अपने जीवन में उत्तम स्थान प्राप्त कर सकते हैं। प्रश्नों का संकलन हिन्दी विषय के साथ-साथ  इतिहास-भूगोलऔर नागरिक शास्त्र पर भी किया गया जो उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पुस्तकों पर आधारित हैं। अलग-अलग पन्नों पर चुने प्रश्नों को विषय और प्रकरण के अनुसार व्यवस्थित कर इसे एक पुस्तक का आकार प्रदान किया है। यह पुस्तक न केवल छात्रों को विषय की समझ को परखने में मदद करेगी बल्कि आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षाओं में भी एक सहायक पुस्तक सिद्ध होगी।
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