
जायस, अमेठी : राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी), जायस के दो दिवसीय सामाजिक-तकनीकी उत्सव ‘सौहार्द्य 2026’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता को समर्पित इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सामाजिक परिषद के संयोजक डॉ. अरविंद सिंह ने पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ तकनीकी नवाचार को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का आह्वान किया। अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) ने विद्यार्थियों को तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक संवेदनशीलता अपनाने की प्रेरणा दी। रक्षा अनुसंधान से जुड़े डॉ. हरीश कुमार ने स्वदेशी नवाचार और आत्मनिर्भरता पर बल दिया, जबकि पर्यावरणविद् प्रो. बिनीषा ने छात्रों को रोजगार तलाशने के बजाय उद्यम सृजन के लिए प्रेरित किया।
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने वैज्ञानिक जिज्ञासा और नागरिक उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया। आरजीआईपीटी के निदेशक ने नवीकरणीय ऊर्जा और ‘अमूल’ जैसे सफल उद्यमों का उदाहरण देते हुए युवाओं को पारंपरिक नौकरियों तक सीमित न रहकर ‘रोजगार सृजक’ बनने और संस्थान के डीआईपी/डीआईसी प्रयासों के तहत स्टार्टअप विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
30–31 अक्टूबर को आयोजित इस उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में ‘निर्माण’ (राष्ट्रीय सम्मेलन), ‘सोशियोथॉन’ (सामाजिक नवाचार चुनौती), विज्ञान प्रदर्शनी, ‘प्रतिबिम्ब’ (लघु फिल्म प्रतियोगिता) और रील निर्माण प्रतियोगिता रहे।
‘सौहार्द्य 2026’ ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि प्रौद्योगिकी, सामाजिक चेतना और उद्यमशीलता के मेल से ही समाज पर सार्थक और दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है। इस आयोजन के माध्यम से संस्थान ने तकनीकी रूप से दक्ष और सामाजिक रूप से उत्तरदायी भावी नेतृत्व तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।