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लखनऊ में 68,500 शिक्षक भर्ती पर भारी हंगामा!

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लखनऊ में 68,500 शिक्षक भर्ती पर भारी हंगामा!

LUCKNOW LIVE: लखनऊ में 68,500 शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, मंत्री आवास पर पहुंचकर उठाई नियुक्ति की मांग

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। नौकरी की मांग को लेकर अभ्यर्थी कई बार सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। लेकिन उनका कहना है कि अभी तक उनकी समस्या का कोई साफ समाधान नहीं निकला है।

इसी मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने लखनऊ में मंत्री के आवास का घेराव किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वहां पहुंचे और नियुक्ति की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला आज का नहीं है। भर्ती का विज्ञापन साल 2018 में आया था और इतने साल गुजर जाने के बाद भी कई अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

अब सवाल ये है कि आखिर 68,500 शिक्षक भर्ती का विवाद क्या है?

दरअसल, अभ्यर्थियों की मुख्य मांग नियुक्ति के साथ-साथ भर्ती में आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों को दूर करने की है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर भर्ती में आरक्षण से जुड़ी समस्या है तो उसे ठीक किया जाए और उसके बाद संशोधित चयन सूची जारी करके पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए।

अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने कई बार सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात की है। उनका कहना है कि अधिकारियों के सामने भी भर्ती से जुड़े सवाल रखे गए, लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

इसी वजह से अब उनका आंदोलन लगातार अलग-अलग जगहों पर दिखाई दे रहा है।

कुछ दिन पहले 68,500 भर्ती के अभ्यर्थी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर भी पहुंचे थे। वहां भी उन्होंने नियुक्ति और आरक्षण से जुड़ी समस्या दूर करने की मांग की थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

इसके बाद अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास का भी घेराव किया। वहां अभ्यर्थी बाहर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारे लगाए। इस प्रदर्शन में भी पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की की खबर सामने आई।

यानी पिछले कुछ समय से एक बात लगातार सामने आ रही है—अभ्यर्थी सरकार से साफ जवाब चाहते हैं। उनका सवाल है कि अगर भर्ती से जुड़ी कमियां दूर की जानी हैं, तो इसका रास्ता क्या होगा? अगर संशोधित चयन सूची बननी है, तो वह कब बनेगी? और अगर नियुक्ति होनी है, तो उसका समय कब तय होगा? अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने इस भर्ती के लिए सालों पहले आवेदन किया था। अब उनके सामने उम्र और भविष्य दोनों का सवाल है। इसी वजह से वे सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग कर रहे हैं।

हालांकि सरकार और विभाग की ओर से इस पूरे मामले में आगे की प्रक्रिया क्या होगी, इस पर अंतिम स्थिति संबंधित आदेश और आधिकारिक फैसले से ही साफ होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि 68,500 शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर लखनऊ की सड़कों पर दिखाई दे रहा है।

अभ्यर्थी लगातार मंत्रियों के आवास तक पहुंच रहे हैं, अपनी मांगें रख रहे हैं और नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

वहीं पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की जा रही है, जिसके दौरान कई बार धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या सरकार 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की आरक्षण से जुड़ी शिकायतों का समाधान करके नियुक्ति का रास्ता साफ करेगी?या फिर हजारों अभ्यर्थियों का ये आंदोलन आगे भी इसी तरह जारी रहेगा?

क्योंकि जिन अभ्यर्थियों ने साल 2018 में शिक्षक बनने का सपना देखा था, उनके लिए अब इंतजार सिर्फ एक नौकरी का नहीं, बल्कि अपने कई सालों के भविष्य का सवाल बन चुका है।

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