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GST के प्रस्तावित बदलाव से प्रभावित हो सकता है सब्सक्रिप्शन आधारित राइड-हेलिंग मॉडल: एस्या सेंटर की रिपोर्ट

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लखनऊ, : एस्या सेंटर द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जीएसटी कानून की धारा 9(5) के तहत सब्सक्रिप्शन आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म को लाने से ड्राइवरों की आय प्रभावित हो सकती है, यात्रियों के लिए किराए में वृद्धि हो सकती है और अनियमित परिवहन सेवाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

‘बैलेंसिंग एफिशिएंसी एंड इक्विटी: एविडेंस फ्रॉम इंडियाज़ टेक्नोलॉजी-इंटरमीडिएटेड ट्रांसपोर्ट सर्विसेज अंडर द जीएसटी रिजीम’ शीर्षक से जारी इस अध्ययन में 13 भारतीय शहरों के 2,103 लोगों को शामिल किया गया। इनमें 1,044 ड्राइवर और 1,059 यात्री शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, सब्सक्रिप्शन आधारित सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म पारंपरिक कमीशन आधारित एग्रीगेटर मॉडल से अलग तरीके से काम करते हैं। इस मॉडल में ड्राइवर बुकिंग प्राप्त करने के लिए एक निश्चित सदस्यता शुल्क का भुगतान करते हैं, जबकि किराया तय करने, भुगतान प्राप्त करने और अपनी कमाई पर उनका पूर्ण नियंत्रण रहता है।

अध्ययन में कहा गया है कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर धारा 9(5) के तहत जीएसटी दायित्व लागू करना कानूनी और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि अधिकांश ड्राइवर जीएसटी पंजीकरण की निर्धारित सीमा से नीचे आते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 86 प्रतिशत ड्राइवरों ने बताया कि वे बुकिंग प्राप्त करने के लिए सब्सक्रिप्शन आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, जबकि 56 प्रतिशत का मानना है कि कम प्लेटफॉर्म लागत के कारण उनकी कुल आय में सुधार होता है। हालांकि, तीन-चौथाई से अधिक ड्राइवरों ने आशंका जताई कि प्रस्तावित कर व्यवस्था से उनकी आजीविका प्रभावित होगी और लगभग 80 प्रतिशत को अपनी शुद्ध आय घटने का डर है।

वहीं, यात्रियों ने भी बढ़ते किराए को लेकर चिंता व्यक्त की। करीब 68 प्रतिशत यात्रियों ने कहा कि यदि किराए में केवल 5 प्रतिशत की भी वृद्धि होती है, तो वे ऐप आधारित कैब और ऑटो सेवाओं का उपयोग कम कर देंगे। लगभग आधे उत्तरदाताओं ने बताया कि बढ़ते खर्च के कारण वे पारंपरिक टैक्सी और ऑटो सेवाओं की ओर लौट सकते हैं। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 90 प्रतिशत यात्रियों ने ऐप आधारित सुरक्षा सुविधाओं को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

रिपोर्ट में नीति-निर्माताओं से मांग की गई है कि धारा 9(5) के प्रावधान केवल उन्हीं मामलों में लागू किए जाएं, जहां प्लेटफॉर्म का किराया निर्धारण और भुगतान संग्रह पर प्रत्यक्ष नियंत्रण हो। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यात्रियों की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन के लिए अपनाए जाने वाले उपायों को व्यावसायिक नियंत्रण का प्रमाण न माना जाए।

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