
बागेश्वर धाम की सनातन एकता यात्रा पर स्वामी प्रसाद मौर्य का विवादित बयान, सियासत में उबाल!
नई दिल्ली: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों सनातन एकता यात्रा निकाल रहे हैं, जो 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर से शुरू हुई थी और 17 नवंबर को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में समाप्त होगी। यह यात्रा धार्मिक और सामाजिक एकता के संदेश के साथ निकाली जा रही है, लेकिन इसके बीच राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस यात्रा और बागेश्वर बाबा पर तीखी टिप्पणी की है। मौर्य ने कहा कि “हिंदू राष्ट्र यात्रा निकालने वाले बागेश्वर बाबा ढोंगी हैं और देशद्रोही हैं। धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का काम किया जा रहा है। संविधान के खिलाफ जाकर हिंदू राष्ट्र की बात करना देश के हित में नहीं है। मैं इस यात्रा की घोर निंदा करता हूं।”

स्वामी प्रसाद मौर्य का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
इस बीच, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और उनके अनुयायियों ने अभी तक मौर्य के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यात्रा के आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य धर्म और समाज में एकता का संदेश फैलाना है और किसी भी तरह की राजनीति या विवाद उनका मकसद नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान ने इस धार्मिक यात्रा को अचानक राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। चुनावी माहौल में ऐसे बयान अक्सर सियासी रोटेशन को तेज कर देते हैं।
बागेश्वर धाम और उनके अनुयायी इस यात्रा के माध्यम से लोगों में सनातन धर्म और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के बाद इस यात्रा के आसपास सुरक्षा और राजनीतिक निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के राजनीतिकरण से सामाजिक माहौल पर क्या असर पड़ता है और देश में धर्म और राजनीति की सीमा कहां खत्म होती है।