
शिया कॉलेज में धूमधाम से आयोजित हुआ ‘जश्न-ए-मुर्सल-ए-आज़म’, हज़रत मोहम्मद (स.अ.) की विलादत के 1500 वर्ष पूरे होने पर उमड़ा जनसैलाब
रसूले ख़ुदा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) की विलादत के 1500 वर्ष पूर्ण होने पर हुआ कार्यक्रम
लखनऊ। रसूले ख़ुदा हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) की विलादत-ए-बासआदत के 1500 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शिया कॉलेज, लखनऊ की ओर से एक अज़ीमुश्शान जश्न-ए-मुर्सल-ए-आज़म का आयोजन शिया कॉलेज, विक्टोरिया स्ट्रीट, बजाज़ा, चौक, लखनऊ में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलमा, ख़ोतबा, अंजुमनों के पदाधिकारी, शायर-ए-अहलेबैत, शिक्षाविद्, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा मोमिनीन ने शिरकत की कार्यक्रम का आग़ाज़ क़ारी नदीम नजफ़ी ने तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से किया। जश्न की निज़ामत प्रो. अब्बास रज़ा नैयर जलालपुरी ने की।

इस अवसर पर मुहर्रम सहित विभिन्न मातमी एवं धार्मिक जुलूसों को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लखनऊ पुलिस एवं नगर के वरिष्ठ अधिकारियों, अमन-शांति समिति तथा विभिन्न संस्थाओं को अंजुमन-ए-हाए मातमी की ओर से सम्मानित किया गया। आयतुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही और मौलाना यासूब अब्बास के हाथों अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को अवॉर्ड प्रदान किए गए। इनमें डीसीपी वेस्ट लखनऊ, एडीसीपी वेस्ट लखनऊ, एसीपी चौक, एसीपी बाज़ारखाला, इंस्पेक्टर चौक, इंस्पेक्टर बाज़ारखाला, इंस्पेक्टर सआदतगंज तथा इंस्पेक्टर ठाकुरगंज, पार्षद लईक़ आग़ा छनमन, शायरे अहलेबैत एजाज़ ज़ैदी, इमरान कुरैशी सहित अन्य अधिकारी एवं संस्थाएं शामिल रहीं। कार्यक्रम में आए अतिथियों का गुलपोशी कर स्वागत भी किया गया।

रसूले इस्लाम जैसी शख्सियत दुनिया में न कभी थी, न क़यामत तक होगी: आयतुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही-
जश्न में विशेष रूप से भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने संबोधित करते हुए कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) ऐसी महान शख्सियत हैं, जिन जैसी शख्सियत दुनिया में न कभी थी और न क़यामत तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम ने फ़रमाया कि मुझे ख़ुदा और हज़रत अली के अलावा किसी ने नहीं पहचाना, जो मेरी जान और मेरा नफ़्स हैं।
युवाओं को दीन और दुनिया का ज्ञान हासिल करना चाहिए: दानिश आज़ाद अंसारी

उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री जनाब दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि इस्लाम हमें नेकी और अच्छाई की ओर ले जाता है। विशेष रूप से हमारे युवाओं को इससे सीख हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन से युवाओं को दीन के साथ-साथ दुनिया का ज्ञान भी प्राप्त होता है।
रसूले ख़ुदा ने इंसानियत का महान संदेश दिया: मौलाना यासूब अब्बास

मौलाना यासूब अब्बास ने अपने संबोधन में रसूले ख़ुदा (स.अ.) के अख़लाक़ और इंसानियत का ज़िक्र करते हुए कहा कि रसूले ख़ुदा ने अपनी सीरत को पूरी दुनिया के सामने इस तरह पेश किया कि जो महिला आप पर कूड़ा फेंका करती थी, उसके बीमार होने पर आप उसका हाल जानने उसके घर गए। उन्होंने कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा पैग़ाम है कि ज़माना आपके साथ कैसा भी व्यवहार करे, लेकिन आपको इंसानियत का दामन नहीं छोड़ना चाहिए रसूले ख़ुदा की विलादत का यह सिलसिला दुनिया के अस्तित्व से भी पुराना है: मौलाना सैयद साइम मेहदी नक़वी मौलाना सैयद साइम मेहदी नक़वी ने कहा कि इतिहास के हवाले से रसूले ख़ुदा की विलादत को 1500 वर्ष पूर्ण हुए हैं, लेकिन हक़ीक़त यह है कि यह सिलसिला उस समय से है जब दुनिया का वजूद भी नहीं था।

जहां हक़ की बात हो, वहां समझौता नहीं हो सकता: प्रो. अली ख़ान महमूदाबाद-प्रो. अली ख़ान महमूदाबाद ने क़ुरआन की आयत का अनुवाद करते हुए कहा कि ख़ुदा फ़रमाता है कि ऐ ईमान वालों! इंसाफ़ पर क़ायम रहो और अल्लाह की राह में गवाही दो, चाहे वह गवाही तुम्हारे अपने ख़िलाफ़ ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि जहां हक़ की बात होती है, वहां किसी तरह का समझौता नहीं हो सकता।
आज दुनिया को सीरत-ए-नबी पर चलने की सबसे अधिक आवश्यकता: डॉ. अब्बास अली मेहदी डॉ. अब्बास अली मेहदी, वाइस चांसलर, एरा यूनिवर्सिटी ने कहा कि आज दुनिया में जो परिस्थितियां हैं, उन्हें देखते हुए मुसलमानों को सीरत-ए-नबी पर चलने की सबसे अधिक आवश्यकता है।क़ुरआन की हर आयत में मोहम्मद (स.अ.) की शान दिखाई देती है: प्रो. अज़ीज़ हैदर प्रो. अज़ीज़ हैदर ने कहा कि पूरा क़ुरआन क़सीदा-ए-मोहम्मद और आले-मोहम्मद है। जब इसे इल्म की निगाह से देखा जाए तो क़ुरआन की हर आयत में मोहम्मद (स.अ.) की शान नज़र आएगी।
रसूले ख़ुदा पूरी कायनात के लिए रहमत हैं: मौलाना एजाज़ अतर
मौलाना एजाज़ अतर ने अपने बयान में कहा कि रसूले ख़ुदा पूरी कायनात के लिए रहमत हैं। उनकी विलादत के समय कई बादशाहों के तख़्त उलट गए। इसका अर्थ यह था कि सरकार की आमद ने यह संदेश दिया कि तख़्त का दौर समाप्त और मिंबर का दौर शुरू हो गया दुनिया में आने से पहले ही ख़ुदा ने अपने महबूब के स्वागत की तैयारी की: अब्बास मुर्तज़ा शम्सी अब्बास मुर्तज़ा शम्सी, मैनेजर, शिया कॉलेज ने कहा कि ख़ुदा ने अपने महबूब को दुनिया में भेजने से पहले ज़मीन का फ़र्श बिछाया और आसमान का शामियाना सजाकर अपने हबीब से मोहब्बत का इज़हार किया। उन्होंने कहा कि आज उनके दुनिया में आने के 1500 वर्ष पूर्ण हो गए हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. शबीहे रज़ा बाक़री, प्रिंसिपल, शिया पी.जी. कॉलेज ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं लोगों का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद शोरा-ए-किराम एजाज़ ज़ैदी, हसन फ़राज़ और ताज कानपुरी ने बारगाह-ए-रिसालत में नज़राना-ए-अक़ीदत पेश किया जश्न में हज़रत-ए-उलेमा, हज़रत-ए-ख़ोतबा, अंजुमन-ए-हाए मातमी, शोरा-ए-किराम, क़ौमी इदारे, मदरिस-ए-अरबिया तथा बड़ी संख्या में मोमिनीन ने शिरकत की। कार्यक्रम श्रद्धा, भाईचारे और पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.) की सीरत एवं शिक्षाओं के संदेश के साथ संपन्न हुआ।