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क़यामत की निशानियाँ सामने आ चुकी हैं क्या हम तैयार हैं।

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क़यामत की निशानियाँ सामने आ चुकी हैं – क्या हम तैयार हैं?

क़यामत का ज़िक्र हर धर्म और तहज़ीब में किसी न किसी रूप में मिलता है। इस्लाम में इसे एक बड़ा दिन बताया गया है, जब हर इंसान के आमाल का हिसाब लिया जाएगा। बहुत से लोग आज के हालात को देखकर पूछते हैं — क्या क़यामत क़रीब है? क्या वो निशानियाँ जो हज़रत मोहम्मद (ﷺ) ने बताई थीं, अब नज़र आने लगी हैं?

क़ुरान और हदीस में क़यामत से पहले की कई छोटी और बड़ी निशानियों का ज़िक्र है। कुछ निशानियाँ वाकई अब सामने आ चुकी हैं।

 

क़यामत क़रीब है?

 

“क़यामत की निशानियाँ सामने आ चुकी हैं – क्या हम तैयार हैं

क़यामत का ज़िक्र हर धर्म और तहज़ीब में किसी न किसी रूप में मिलता है। इस्लाम में इसे एक बड़ा दिन बताया गया है, जब हर इंसान के आमाल का हिसाब लिया जाएगा। बहुत से लोग आज के हालात को देखकर पूछते हैं — क्या क़यामत क़रीब है? क्या वो निशानियाँ जो हज़रत मोहम्मद (ﷺ) ने बताई थीं, अब नज़र आने लगी हैं?

 

क़ुरान और हदीस में क़यामत से पहले की कई छोटी और बड़ी निशानियों का ज़िक्र है। कुछ निशानियाँ वाकई अब सामने आ चुकी हैं।

 

क़यामत का ज़िक्र इस्लामी तालीमात में एक बहुत अहम और यक़ीनी हक़ीक़त के तौर पर मिलता है। रसूल अल्लाह (ﷺ) ने अपनी बहुत सी हदीसों में इसकी निशानियों को बयान फ़रमाया है। आज जब हम दुनिया के हालात पर नज़र डालते हैं तो बहुत सी निशानियाँ वैसी ही नज़र आती हैं जैसी नबी करीम (ﷺ) ने बताया था। सहीह मुस्लिम की हदीसों के मुताबिक, क़यामत से पहले इल्म उठ जाएगा, जाहिलत फैल जाएगी, शराबनोशी और ज़िना आम हो जाएगा, और लोग बेहिस होकर एक-दूसरे का क़त्ल करने लगेंगे (सहीह मुस्लिम: 2671, 2908)। आज के दौर में ये सब चीज़ें खुल कर सामने आ रही हैं।

 

 

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