
पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान का संघर्ष शुरू?
PAKISTAN -AFGHANISTAN CLASHES: Pakistan ने हाल ही में काबुल, Paktika और कंधार में हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में Afghan Taliban ने दावा किया है कि उसने सीमा पर जवाबी कार्रवाई की है। दोनों पक्ष कह रहे हैं कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुँचाया है, लेकिन इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। इस वजह से सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
यह ताज़ा झड़प उस युद्धविराम (सीज़फ़ायर) के बाद हुई है, जिस पर अक्टूबर 2025 में सहमति बनी थी। उस समय दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने का वादा किया था। लेकिन पिछले कुछ समय से फिर से तनाव बढ़ने लगा। छोटे-छोटे टकराव, आरोप-प्रत्यारोप और गोलीबारी की घटनाओं ने माहौल को और खराब कर दिया।
इस विवाद की एक बड़ी जड़ डूरंड लाइन है। डूरंड लाइन अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की वह सीमा है, जिसे ब्रिटिश शासन के समय तय किया गया था। अफ़ग़ानिस्तान की कई सरकारें इस सीमा को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करती रही हैं। इसी वजह से सीमा पर अक्सर विवाद और झड़पें होती रहती हैं।

तनाव की दूसरी बड़ी वजह टीटीपी यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान है। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं अफ़ग़ान तालिबान इन आरोपों को नकारते रहे हैं। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी सीमा पर कोई बड़ा हमला या आतंकी घटना होती है, तो दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ जाता है। राजनीतिक दबाव, सुरक्षा चिंताएं और पुराने विवाद मिलकर हालात को और जटिल बना देते हैं। सीज़फ़ायर के बावजूद ज़मीनी स्तर पर शांति पूरी तरह कायम नहीं हो पाती।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाज़ी जारी है। आम लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल है, खासकर सीमा से लगे इलाकों में। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
कुल मिलाकर, यह नया संघर्ष अचानक नहीं शुरू हुआ, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद, टीटीपी के मुद्दे और आपसी अविश्वास का नतीजा है। जब तक इन मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, तब तक सीमा पर तनाव बार-बार भड़कने की आशंका बनी रहेगी।