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ईरान पर UAE का हमला? वाल स्ट्रीट जर्नल  रिपोर्ट से बड़ा खुलासा!

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ईरान पर UAE का हमला? वाल स्ट्रीट जर्नल  रिपोर्ट से बड़ा खुलासा!

IRAN US WAR 2.0: मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के टकराव के बीच अब एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अब तक खुद को इस युद्ध से दूर बताने वाला संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE भी कथित तौर पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल था। दावा है कि UAE ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों, तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए। सबसे बड़ा खुलासा अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार Wall Street Journal की रिपोर्ट में हुआ है, जिसमें कहा गया है कि UAE ने न सिर्फ ईरान के खिलाफ दर्जनों हमले किए, बल्कि इन हमलों में उसे अमेरिका और इजरायल की खुफिया मदद भी मिली। इतना ही नहीं, इजरायल ने UAE की सुरक्षा के लिए आयरन डोम बैटरियां और सैनिक तक भेजे थे। आखिर पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था? और इससे मध्य पूर्व की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है? समझते हैं विस्तार से।

ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने के दौरान UAE लगातार यह संदेश देता रहा कि वह युद्ध का हिस्सा नहीं है और क्षेत्र में स्थिरता चाहता है। लेकिन Wall Street Journal की रिपोर्ट ने इस दावे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक UAE ने गुप्त रूप से ईरान के अंदर कई सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए। इनमें फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप की तेल रिफाइनरी, केशम द्वीप, अबू मूसा द्वीप और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट का दावा है कि ये हमले युद्ध के शुरुआती दिनों से लेकर युद्धविराम के बाद तक जारी रहे।

सबसे अहम सवाल है कि UAE ऐसा क्यों कर रहा था? रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने युद्ध के दौरान UAE पर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। कहा गया कि UAE को किसी भी अन्य खाड़ी देश की तुलना में सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया। इसके बाद अबू धाबी ने जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया और कथित तौर पर ईरान की ऊर्जा संरचना को निशाना बनाया। लावान द्वीप की रिफाइनरी पर हुआ हमला इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। इस हमले से रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा इजरायल की भूमिका को लेकर किया गया है। दावा है कि इजरायल ने UAE को सिर्फ खुफिया जानकारी ही नहीं दी, बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कर्मियों को भी तैनात किया। अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी और अन्य अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया कि आयरन डोम ने UAE की ओर आने वाली ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में मदद की। यह पहली बार माना जा रहा है कि इजरायल का आयरन डोम किसी खाड़ी देश की रक्षा में इतने बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ।

Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार UAE, अमेरिका और इजरायल के बीच समन्वय युद्ध के दौरान काफी गहरा था। रिपोर्ट में कहा गया कि कई हमलों के लिए खुफिया जानकारी अमेरिका और इजरायल ने उपलब्ध कराई। यही वजह है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे ईरान के ऊर्जा और समुद्री नेटवर्क के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। केशम द्वीप और अबू मूसा द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित हैं, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों के रिश्तों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि UAE की आक्रामक भूमिका को लेकर सऊदी अरब असहज था। जहां UAE सैन्य जवाब देने के पक्ष में दिखा, वहीं सऊदी अरब कथित तौर पर कूटनीतिक रास्ते पर जोर देता रहा। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद भी सामने आए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब्राहम समझौते के बाद UAE और इजरायल के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग के बाद अब सैन्य समन्वय की खबरें इस साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाती दिख रही हैं। अगर रिपोर्ट के दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत होगा कि मध्य पूर्व में नए सुरक्षा गठबंधन तेजी से आकार ले रहे हैं और ईरान के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनता जा रहा है।

हालांकि UAE ने इन हमलों को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। Reuters ने भी कहा है कि वह Wall Street Journal की रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका। इसलिए इन दावों को फिलहाल रिपोर्ट्स और सूत्रों के आधार पर देखा जा रहा है। लेकिन इतना तय है कि इन खुलासों ने मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है

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