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ईरान की सऊदी अरब को खुली चेतावनी!

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ईरान की सऊदी अरब को खुली चेतावनी!

TEHRAN LIVEदुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइनों में शामिल होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और नई चेतावनियों ने पूरे मध्य पूर्व का माहौल गर्म कर दिया है। ताज़ा घटनाक्रम के बीच यह दावा किया जा रहा है कि अगर क्षेत्रीय देशों ने बाहरी ताकतों का साथ देना जारी रखा तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि तेल व्यापार, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज़ केवल एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है, इसलिए यहां पैदा होने वाला हर तनाव पूरी दुनिया पर असर डाल सकता है।

इसी बीच यह भी चर्चा तेज़ हो गई है कि होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाज़ों की सुरक्षा के नाम पर नई व्यवस्था लागू की जा रही है। कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि समुद्री सुरक्षा उपलब्ध कराने के बदले जहाज़ों से शुल्क या विशेष भुगतान की मांग की जा सकती है। समर्थकों का कहना है कि यह व्यवस्था समुद्री डकैती, ड्रोन हमलों और मिसाइल खतरों से जहाज़ों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि यह सुरक्षा के नाम पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश है। अगर ऐसी व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहती है तो उसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और दुनिया भर में महंगाई पर पड़ सकता है।

उधर खाड़ी के कई देशों को लेकर भी नई अटकलें सामने आ रही हैं। क्षेत्र में यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि किसी भी देश ने बाहरी सैन्य अभियानों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहयोग किया तो उसे संभावित जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह की चेतावनियों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। कई देशों ने अपने महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का नया दौर शुरू हो सकता है।

दूसरी ओर लाल सागर और यमन से जुड़े हालात भी लगातार चर्चा में हैं। पिछले कुछ समय से समुद्री मार्गों पर हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या क्षेत्र में एक नया सैन्य टकराव शुरू हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी बड़े युद्ध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती सैन्य तैयारियां और बयानबाज़ी इस आशंका को ज़रूर बढ़ा रही हैं कि हालात कभी भी बदल सकते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी अपने जहाज़ों के मार्ग और सुरक्षा रणनीति की समीक्षा कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज़ या लाल सागर के रास्तों में किसी तरह की बड़ी रुकावट आती है तो सबसे पहले असर ऊर्जा बाज़ार पर दिखाई देगा। दुनिया के कई देश अपनी तेल और गैस की ज़रूरतों के लिए इन्हीं समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं। इसके बाद पेट्रोल, डीज़ल, गैस, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नज़र इस समय मध्य पूर्व के बदलते हालात पर टिकी हुई है।

इस बीच कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और प्रमुख शक्तियां लगातार संयम बरतने की अपील कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि तनाव को बातचीत के जरिए कम नहीं किया गया तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश पर भी पड़ेगा। समुद्री व्यापार में किसी भी तरह की बाधा से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच होने वाले माल परिवहन पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि कई देशों ने कूटनीतिक स्तर पर बातचीत तेज़ कर दी है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दबाव की भी लड़ाई है। समुद्री मार्गों पर नियंत्रण, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की होड़ ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे माहौल में किसी भी छोटी घटना के बड़े संघर्ष में बदलने का खतरा बना रहता है। इसलिए हर नई गतिविधि पर पूरी दुनिया की नज़र है।

हालांकि अभी तक कई दावों और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए किसी भी बड़े युद्ध, नए शुल्क या व्यापक सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी। आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति, आधिकारिक बयानों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं से यह साफ होगा कि तनाव कम होता है या फिर नया संकट खड़ा होता है।

फिलहाल इतना तय है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य और पूरे खाड़ी क्षेत्र की घटनाएं केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं हैं। इनका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि हर नया घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या फिर यह तनाव आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है।

 

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