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ईरान की बड़ी जीत! बहरीन में अमेरिका का एयरबेस तबाह!

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ईरान की बड़ी जीत! बहरीन में अमेरिका का एयरबेस तबाह!

 

 

IRAN -US TENSION:खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है और हालात तेजी से एक व्यापक सैन्य टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। Bahrain में स्थित शेख ईसा एयर बेस पर हुए भीषण हमले ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात आसमान में कई धमाकों की आवाज़ें गूंजीं, जिसके बाद बेस के ऊपर आग और धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया। ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसने 20 आत्मघाती ड्रोन और तीन सटीक निर्देशित मिसाइलों से अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाया।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई हाल ही में हुए अमेरिका–इज़राइल संयुक्त अभियानों के जवाब में की गई। तेहरान का कहना है कि यह “रक्षात्मक प्रतिरोध” है, जबकि United States ने इसे सीधा आक्रामक हमला करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। अमेरिकी रक्षा सूत्रों के मुताबिक, हमले में मुख्य कमांड एवं नियंत्रण भवन, संचार प्रणाली और ईंधन भंडारण टैंकों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि वॉशिंगटन का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ प्रक्षेप्य बेस परिसर के अंदर गिरने में सफल रहे।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके व्यापक प्रभाव पड़ रहे हैं। Israel ने अपनी उत्तरी और दक्षिणी सीमाओं पर सतर्कता बढ़ा दी है, जबकि Lebanon में भी सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो इसमें कई क्षेत्रीय शक्तियां सीधे तौर पर शामिल हो सकती हैं। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और अतिरिक्त नौसैनिक जहाज़ों की तैनाती की खबरें भी सामने आ रही हैं।
इस संकट का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है और कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने अपने उड़ान मार्ग बदल दिए हैं। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव साफ नजर आ रहा है।

राजनयिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई देशों ने संयम बरतने और तत्काल वार्ता की अपील की है। हालांकि जमीनी हालात यह संकेत दे रहे हैं कि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि हमले और जवाबी हमले इसी तरह जारी रहे, तो यह टकराव एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर विश्व राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं—कूटनीति की मेज पर या युद्ध के मैदान में।

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