
विजय सरकार के पहले दिन ही बवाल: सहयोगियों ने उठाए वैचारिक सवाल
TAMILNADU LIVE:तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता संभालते ही बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। Vijay की अगुवाई में बनी नई सरकार को अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि सहयोगी दलों ने खुलकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विवाद की शुरुआत शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जहां ‘वंदे मातरम’ बजाए जाने पर गठबंधन सहयोगी Thol. Thirumavalavan ने तीखी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति हमेशा क्षेत्रीय पहचान, भाषा और सामाजिक न्याय की विचारधारा पर खड़ी रही है, ऐसे में समारोह में इस तरह के प्रतीकों को प्रमुखता देना कई सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा तेज है कि क्या Tamilaga Vettri Kazhagam यानी TVK अपनी मूल विचारधारा से अलग रास्ते पर बढ़ रही है? क्या राष्ट्रीय राजनीति के दबाव में तमिल पहचान को पीछे किया जा रहा है? यही वजह है कि विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दल भी अब सरकार के शुरुआती संकेतों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।
विवाद सिर्फ यहीं नहीं रुका। मुख्यमंत्री विजय के उस बयान ने भी नई बहस छेड़ दी जिसमें उन्होंने कहा कि पिछली सरकार तमिलनाडु पर “10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज” छोड़ गई है।
इस बयान पर भी सहयोगी दलों ने असहमति जताई है। उनका आरोप है कि सरकार जनता के बीच आर्थिक डर और असुरक्षा का माहौल बना रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि नई सरकार को शुरुआत सकारात्मक एजेंडे से करनी चाहिए थी, लेकिन पहले ही दिन संकट और कर्ज की राजनीति शुरू कर दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक बयान या गीत का विवाद नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर वैचारिक टकराव की शुरुआती झलक है। एक तरफ विजय खुद को नई पीढ़ी की राजनीति का चेहरा साबित करना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ उनके सहयोगी चाहते हैं कि द्रविड़ आंदोलन की पारंपरिक लाइन से कोई समझौता न हो। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या तमिलनाडु की नई सरकार बनने के साथ ही अंदरूनी संघर्ष शुरू हो चुका है? और क्या यह वैचारिक खींचतान आने वाले दिनों में सरकार की स्थिरता पर असर डाल सकती है?