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युवाओं को चीजें छूने में लग रहा करंट KGMU में बढ़े मरीज 

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युवाओं को चीजें छूने में लग रहा करंट KGMU में बढ़े मरीज 

KGMU LIVE NEWS LUCKNOW: डॉक्टर बोले विटामिन की कमी लाइफस्टाइल वजह:

क्या आपको भी ऑफिस में काम करते समय मेटैलिक चीजों को छूते ही हल्का करंट महसूस होता है? अब यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहां के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में भी कई लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक पहले लोग इसे सामान्य स्टैटिक शॉक समझकर नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब कुछ मरीजों में यह समस्या बार-बार सामने आ रही है। कुछ मामलों में हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन और हल्की जलन जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। क्यों होता है ऐसा ? क्या है इसके पीछे कारण  क्या कहते हैं एक्सपर्ट पढ़िए पूरी रिपोर्ट सबसे पहले पढ़िए ये केस- लखनऊ के रहने वाले हरिओम् गुरुग्राम स्थित एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उन्होंने बताया कि ऑफिस में काम करते समय या घर में टेबल और कुर्सी छूने पर अचानक करंट जैसा महसूस होता है। कई बार लैपटॉप या मोबाइल चार्जर के संपर्क में आने पर भी हल्का झटका लगता है जो इलेक्ट्रिक शॉक जैसा ही होता है। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन जब यह समस्या रोजाना होने लगी तो चिंता बढ़ गई। इसी कारण उन्होंने KGMU के न्यूरोलॉजी विभाग में परामर्श लिया। हरिओम के अनुसार, डॉक्टर ने शुरुआती जांच के बाद कुछ टेस्ट लिखे हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का इलाज तय किया जाएगा।

हरिओम को कई बार मेटैलिक चीजें छूने पर करंट जैसा झटका महसूस होता था। इस समस्या से परेशान होकर उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में जाकर डॉक्टर से परामर्श लिया। युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या KGMU के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ.राजेश वर्मा ने बताया कि हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। खासकर कॉरपोरेट सेक्टर, IT कंपनियों और लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने वाले युवा इस समस्या के साथ OPD पहुंच रहे हैं।

डॉ.राजेश वर्मा के अनुसार, यह केवल सामान्य करंट का मामला नहीं होता। कई बार शरीर की नसों, त्वचा की संवेदनशीलता, तनाव, लगातार स्क्रीन पर काम करने, नींद की कमी और मानसिक थकान जैसी स्थितियां भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं। कुछ मरीजों में विटामिन की कमी या न्यूरोलॉजिकल कारण भी सामने आते हैं।

डॉ. राजेश वर्मा का कहना है कि हर मरीज में कारण अलग-अलग हो सकता है, इसलिए बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है। मरीजों को जरूरी ब्लड टेस्ट, नर्व संबंधी जांच और अन्य पैरामीटर के आधार पर दवाएं दी जा रही हैं।स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी और शरीर की संवेदनशीलता विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार यह समस्या स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी के कारण भी होती है। एयर कंडीशनर वाले वातावरण, सिंथेटिक कपड़ों, लगातार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संपर्क और कम नमी वाले माहौल में शरीर में इलेक्ट्रिक चार्ज जमा हो सकता है। जब व्यक्ति किसी मेटल को छूता है तो हल्का झटका महसूस होता है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अगर यह अनुभव बहुत ज्यादा होने लगे या उसके साथ हाथों में दर्द, झनझनाहट, कमजोरी या नसों से जुड़ी अन्य शिकायतें भी हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

तनाव और खराब लाइफस्टाइल भी बड़ी वजह KGMU के डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार तनाव में रहना, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधि की कमी भी शरीर की नसों और संवेदनशीलता पर असर डालती है। आईटी और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवा अक्सर 8 से 12 घंटे तक लैपटॉप पर काम करते हैं। इससे शरीर में थकान, मांसपेशियों में खिंचाव और न्यूरोलॉजिकल बदलाव देखने को मिलते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई युवा कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स का अधिक सेवन करते हैं, जिससे भी शरीर की प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा विटामिन B12 और विटामिन D की कमी भी नसों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकती है।

ड्यूरेशन न्यूरो OPD में मरीजों की संख्या
10 अप्रैल से 9 मई 20
10 मार्च से 9 अप्रैल 9
10 फरवरी से 9 मार्च 6
10 जनवरी से 9 फरवरी 5

सेल्फ मेडिकेशन से बचने की सलाह इंटरनेट या सोशल मीडिया देखकर खुद से दवा न लें बॉडी में करंट” समझकर बिना जांच इलाज शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है बार-बार करंट जैसा झटका महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें हाथ-पैर में सुन्नपन या झनझनाहट बनी रहे तो डॉक्टर से मिलें कमजोरी या असहजता महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें सही जांच के बाद ही इलाज शुरू करें बढ़ती डिजिटल लाइफस्टाइल के बीच नई चुनौती विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल के साथ इस तरह की समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। पहले जहां यह केवल सामान्य स्टैटिक शॉक माना जाता था, वहीं अब लगातार शिकायतों के चलते लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। KGMU के डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इन उपायों से बचा जा सकता है इससे बचने के लिए समय-समय पर अपने पैर जमीन से टच कराते रहें, ताकि शरीर में जमा इलेक्ट्रॉन चार्ज जमीन में चला जाए। ऐसे में बॉडी चार्ज नहीं होगी, तो आपको करंट का झटका भी महसूस नहीं होगा। अगर पैरों में जूते पहन रखे हों तो कोशिश करें कि थोड़ी-थोड़ी देर में अपनी कोहनी या हाथों को दीवार से टच करते रहें। इससे भी आपको किसी सामान या इंसान से करंट लगने की संभावना कम हो सकती है। ये हैं अलर्ट के साइन  शरीर में विटामिन B12, B6 और B1 की कमी एक वजह हो सकती है दिन में कई बार करंट जैसा झटका महसूस होना गंभीर संकेत हो सकता है बार-बार झटके लगें तो इसे नजरअंदाज न करें देर करने पर समस्या बढ़ सकती है ऐसे लक्षण दिखें तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें ऐसे रखे खुद को फिट लगातार कई घंटों तक स्क्रीन के सामने न बैठें। हर 40-45 मिनट में छोटा ब्रेक लें। पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। संतुलित आहार लें और विटामिन की जांच कराएं। सिंथेटिक कपड़ों की जगह कॉटन कपड़ों का इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की वायरिंग और अर्थिंग की जांच कराएं।

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