
ईरान-अमेरिका युद्ध की पूरी कहानी: कैसे शुरू हुआ संघर्ष, कहाँ तक पहुँचा और आगे क्या?
IRAN-US TENSION: मध्य पूर्व में Iran और United States के बीच 2026 का संघर्ष दुनिया के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संकटों में गिना जा रहा है। इस युद्ध ने न केवल पूरे पश्चिम एशिया को हिला दिया, बल्कि तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी गहरा असर डाला।
युद्ध की शुरुआत कैसे हुई?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए ईरान के कई सैन्य, मिसाइल और सरकारी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती 12 घंटों में सैकड़ों हमले किए गए। अमेरिका का दावा था कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए की गई।
इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, इज़रायल और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। संघर्ष तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गया।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों बना सबसे बड़ा मुद्दा?
युद्ध के बाद ईरान ने Strait of Hormuz पर दबाव बढ़ा दिया। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल-परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान की कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी प्रभावित हुई और तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई।बाद में अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक दबाव बढ़ाते हुए समुद्री नाकाबंदी लागू की और क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात किए।

मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार
मार्च से मई 2026 के बीच कई बार दोनों पक्षों के बीच मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक हमले हुए। अमेरिकी युद्धपोतों, खाड़ी क्षेत्र के ठिकानों और तेल अवसंरचना को निशाना बनाया गया। जवाब में अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
7 मई को अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच होर्मुज़ क्षेत्र में बड़ा टकराव हुआ, जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए।
युद्धविराम और शांति वार्ता
अप्रैल में अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन संघर्ष पूरी तरह नहीं रुका। पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों की मध्यस्थता से बातचीत शुरू हुई। कई दौर की वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान 60 दिन के संघर्षविराम विस्तार पर चर्चा कर रहे हैं।
हालांकि दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं। अमेरिकी नेतृत्व समझौते के करीब होने की बात कह रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि अंतिम सहमति अभी नहीं बनी है।
अमेरिका की नई चेतावनी
आज की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य तैयारी बरकरार रखी है।
आम लोगों पर असर
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। ईरान में महंगाई, बेरोजगारी, दवाइयों की कमी और आर्थिक संकट गहरा गया है। कई क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है और लाखों लोग युद्ध के असर से जूझ रहे हैं।
दुनिया क्यों चिंतित है?
• तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव
• वैश्विक व्यापार और शिपिंग पर असर
• पूरे मध्य पूर्व में युद्ध फैलने का खतरा
• परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई चिंताएँ
• अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव