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नेतन्याहू से झगड़ा, खामेनेई से दोस्ती? ट्रंप का यू-टर्न या नई चाल

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 नेतन्याहू से झगड़ा, खामेनेई से दोस्ती? ट्रंप का यू-टर्न या नई चाल

IRAN-US TENSION: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिस ईरानी सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei को लेकर कुछ महीने पहले तक सख्त बयानबाजी हो रही थी, अब उसी नेता से मिलने की इच्छा अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने जाहिर कर दी है। ट्रंप ने एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में कहा कि अगर परिस्थितियां सही रहीं तो वह ईरान के सुप्रीम लीडर से मिलना चाहेंगे और यह उनके लिए सौभाग्य की बात होगी।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, जबकि परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी दोनों देशों के बीच बड़े विवाद का कारण बने हुए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने को लेकर सहमत है और इसी दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह बयान उस समय सामने आया जब ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच फोन पर हुई बातचीत भी चर्चा में रही। कई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने नेतन्याहू की कुछ सैन्य कार्रवाइयों को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। बाद में ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि वह नेतन्याहू के कुछ कदमों से परेशान थे, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बने हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह नया रुख किसी अचानक बदलाव का संकेत नहीं बल्कि उनकी पुरानी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रंप पहले भी विरोधी देशों के नेताओं से सीधे संवाद की नीति अपनाते रहे हैं। चाहे मामला उत्तर कोरिया का रहा हो या अन्य देशों का, ट्रंप अक्सर कहते रहे हैं कि बातचीत युद्ध से बेहतर विकल्प है। ऐसे में ईरान के सुप्रीम लीडर से मुलाकात की इच्छा भी उसी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका पूरी तरह नरम पड़ गया है। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती तो दूसरे विकल्प भी खुले हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। यानी एक तरफ बातचीत की पेशकश है तो दूसरी तरफ दबाव की नीति भी जारी है।

इसी बीच ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वह बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। हालांकि क्षेत्रीय संघर्ष, इजरायल की सैन्य कार्रवाई और सुरक्षा चिंताओं के कारण कई बार वार्ता प्रक्रिया बाधित हुई है। हाल के दिनों में कुछ दौर की बातचीत रुकने की खबरें भी सामने आईं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर के बीच वास्तव में मुलाकात होगी? अगर ऐसा होता है तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ अमेरिका-ईरान संबंधों में बदलाव आ सकता है बल्कि इजरायल, खाड़ी देशों और पूरी दुनिया की रणनीतिक गणनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। क्या यह आने वाले किसी बड़े समझौते का संकेत है या सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा। लेकिन अभी दुनिया की नजर वॉशिंगटन, तेहरान और तेल अवीव के बीच चल रही इस कूटनीतिक शतरंज पर टिकी हुई है।

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