
नई तकनीक से पैदावार और किसानों की आमदनी बढ़ेगी : सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह
सवायजपुर (हरदोई)। गन्ना किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से आज हरदोई के सवायजपुर रॉयल कृष्णा ग्रैंड लॉन एंड बैंक्वेट में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के तत्वावधान में गन्ना चुनौतियां एवं भविष्य की दिशा विषय पर आयोजित किसान संगोष्ठी में मुख्य अतिथि सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हमारे क्षेत्र की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है, लेकिन किसानों की वास्तविक समृद्धि तभी संभव है जब वे आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों को अपनाएंगे।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की आय बढ़ाने वाली सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल है।

यदि किसान नई उन्नत किस्मों, सही प्रबंधन और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, तो वे उत्पादन बढ़ाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमारे वैज्ञानिक, कृषि विभाग, चीनी मिल और किसान यदि मिलकर कार्य करें, तो गन्ना उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाकर किसानों के जीवन में वास्तविक खुशहाली लाई जा सकती है।

किसान संगोष्ठी में डॉ.आर.जी अग्रवाल, चेयरमैन एमेरिटस धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने कहा कि भारतीय कृषि में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब किसान विज्ञान के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। उन्होंने आगे कहा कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक पदार्थों का उपयोग, पानी के संरक्षण के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाना, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन तथा फसल विविधीकरण समृद्ध खेती के प्रमुख आधार हैं। विशेष रूप से गन्ने जैसी अधिक पानी वाली फसलों में ड्रिप सिंचाई और आधुनिक जैविक तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। डॉ.आर.जी अग्रवाल ने कहा कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर सकते हैं तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि धानुका एग्रीटेक लिमिटेड सदैव किसानों को बेहतरीन कृषि समाधान और सेवाएँ प्रदान करने में अग्रणी रही है। धानुका पहल के अंतर्गत किसानों को ड्रोन स्प्रेयिंग सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जो विशेष रूप से गन्ने की फसल के लिए अत्यंत उपयोगी है क्योंकि गन्ने की फसल एक निश्चित ऊँचाई के बाद इतनी सघन और लंबी हो जाती है कि मैन्युअल छिड़काव न तो संभव रहता है

और न ही प्रभावी।संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के विशेषज्ञों ने बेहतर गन्ना प्रजातियों का चयन, वैज्ञानिक बुवाई तकनीक, खाद और पानी का सही प्रबंधन, कीटों और बीमारियों से फसल की सुरक्षा, गन्ने की गुणवत्ता सुधारने के उपाय तथा सही समय पर कटाई की जानकारी दी। इस अवसर पर क्षेत्र के 400 से अधिक गन्ना किसानों ने संगोष्ठी में भाग लिया।