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UPI चार्ज के खिलाफ देशभर में विरोध, 15 अक्टूबर से नया शुल्क लागू।

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UPI चार्ज के खिलाफ देशभर में विरोध, 15 अक्टूबर से नया शुल्क लागू।

15 अक्टूबर 2026 से 2,000 से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के फैसले के खिलाफ देशभर में व्यापारियों, विपक्षी राजनीतिक दलों और संगठनों का भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। इस विवाद की ताजा स्थिति और मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

देशभर में व्यापारियों का “No UPI” आंदोलन

पोस्टर और नोटिस: दिल्ली-NCR, गाजियाबाद और चांदनी चौक जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में दुकानदारों और पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी दुकानों के बाहर “No UPI, Only Cash” और “UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे” के बोर्ड लगा दिए हैं।

मुनाफे पर असर: व्यापारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले व्यापार में 0.4% का शुल्क (जो ₹75,000 से अधिक के लेनदेन पर अधिकतम ₹300 तक हो सकता है) उनके मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर देगा।

 

⚖️ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सरकार की 14 और 15 सितंबर की अधिसूचनाओं और इस नए एमडीआर फ्रेमवर्क को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि यह फैसला बिना सार्वजनिक परामर्श और पारदर्शिता के लिया गया है, जो कम मार्जिन वाले व्यापारियों के साथ भेदभाव करता है।

राहुल गांधी का आरोप: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार ने अमेरिकी कंपनियों (जैसे Visa और Mastercard) के दबाव में डिजिटल पेमेंट पर यह ‘टैक्स’ लगाया है, जिसका अंतिम बोझ घूम-फिरकर जनता पर ही पड़ेगा।

सड़कों पर प्रदर्शन: लखनऊ सहित कई शहरों में कांग्रेस और व्यापारिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। बीजू जनता दल (BJD) जैसे दलों ने भी मांग की है कि सरकार आरबीआई से मिलने वाले लाभांश का उपयोग इस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करे, न कि व्यापारियों पर बोझ डाले।

आम जनता के लिए क्या है नियम

ग्राहकों के लिए फ्री: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सरकार ने साफ किया है कि आम ग्राहकों के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा। यह शुल्क केवल व्यापारी को देना होगा और वे इसे ग्राहक से नहीं वसूल सकते।

96% लेनदेन अप्रभावित: सरकार के अनुसार, ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। चूंकि देश के 95% से अधिक P2M लेनदेन ₹2,000 से कम के होते हैं, इसलिए आम यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं होगा।

आरबीआई का रुख: रिजर्व बैंक (RBI) ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए यह शुल्क आवश्यक है।

 

UPI के नए Rule पर जनता की राय! ₹2000 से ऊपर Payment पर क्या बोले लोग? |

इस पूरे मामले में यदि सुप्रीम कोर्ट का कोई नया आदेश आता है या सरकार नियमों में कोई बदलाव करती है, तो क्या आप चाहते हैं कि मैं एक information agent सेट करके आपको इसकी लाइव अपडेट भेजता रहूं?

 

 

 

 

 

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