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हामिद अंसारी के बयान पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, कहा- भारत और सनातन परंपरा के लिए डरावना

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हामिद अंसारी के बयान पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, कहा- भारत और सनातन परंपरा के लिए डरावना

 

NEWDELHI: पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर देश की सियासत में बहस तेज हो गई है। हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में आयोजित ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का हवाला देते हुए कहा था कि भारत के लिए खतरा कम्युनिज्म से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था। उनके इस बयान के बाद बीजेपी और कई हिंदू संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

इसी बयान को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक कार्यक्रम में हामिद अंसारी पर पलटवार किया। मुख्यमंत्री योगी ने उनके बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि ये बातें भारत, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के लिए डरावनी हैं। योगी ने यह भी कहा कि संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से पद की गरिमा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि हामिद अंसारी ने उपराष्ट्रपति के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है और ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहने वाले व्यक्ति को अपने वक्तव्यों में मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अंसारी के बयान को भारत और भारतीयता के खिलाफ बताया और कहा कि अगर वे हिंदू दृष्टि और भारतीय परंपरा के भाव को समझते, तो इस तरह की टिप्पणी नहीं करते।

वहीं, हामिद अंसारी ने जिस बयान का हवाला दिया, उसमें उन्होंने नेहरू के पुराने कथन को सामने रखा था। अंसारी ने बताया कि नेहरू ने भारत के सामने मौजूद खतरे के संदर्भ में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर चिंता जताई थी। इस दौरान उन्होंने लेखक और संवैधानिक विशेषज्ञ ए.जी. नूरानी के विचारों का भी उल्लेख किया।

अब इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। बीजेपी की ओर से भी अंसारी की टिप्पणी की आलोचना की गई है, जबकि दूसरी ओर कुछ लोगों ने उनके बयान को ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में रखकर देखने की बात कही है। कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी अंसारी की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए धार्मिक सद्भाव और सामाजिक एकता पर जोर दिया है।

यानी एक तरफ पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का बयान है, जिसमें उन्होंने नेहरू के पुराने कथन के जरिए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर चिंता का जिक्र किया, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तीखी प्रतिक्रिया है, जिसमें उन्होंने इस बयान को भारत और सनातन परंपरा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और डरावना बताया है। इस बयान के बाद अब सियासी बहस और तेज हो गई है।

फिलहाल यह मामला सिर्फ एक बयान और उसके जवाब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत में सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता, भारतीय संस्कृति और राजनीतिक विचारधारा को लेकर एक बड़ी बहस फिर सामने आ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

 

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