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मुल्क की आजादी में उर्दू अखबार का किरदार

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लखनऊ: तहज़ीब और अदब के शहर में एक सेमिनार और अवार्ड शो अयोजित किया गया। सेमिनार का विषय भारत को 1947 में मिली आज़ादी में उर्दू अख़बरात के एहम किरदार को ज़ाहिर और याद करना था। सेमिनार को फकरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी द्वारा ख़ूबसूरती से आयाजित किया गया। जिसमें तहज़ीब और अदब का बेहतर इल्म रखने वाले के वरिष्ठ पत्रकार मौजूद हुए। जिन्को आयोजनों के ज़रिए अवार्ड एवं उपहारों से सम्मानित किया गया।
 सभी मौजूदा पत्रकारो ने अपने वरिष्ठ पत्रकारो की जिंदगी के अहम और अच्छे किस्सो को सबके मद्दे  नजंर करते हुए सभी की इज़्ज़तअफ्ज़ाई की। सभी अखबारों के गुजरे हुए लेखको की भी बेबाक जिंदगी और शहादत को याद किया गया।  इसी अवसर पर एसएन लाल की लिखी हुई किताब  तारीख़ें आज़ादी और अवध की भी रसमे इजरा की गई।
 जिस्के बाद अवार्ड और इज्जत-अफज़ाई के इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए सभी पत्रकारो कैमरामैंन और अख़बारों में अहम किरदार निभाने वाले सभी लोगो को सम्मान किया गया। साथ ही हमारे बीच न मौजूद मरहूम वकार रिज़वी के नाम को अवार्ड से सम्मानित किया गया ।
 जिसके साथ इसी अवसर पर उर्दू सब्जेक्ट में अच्छे नंबर लाने वाले 16 छात्रों को भी निशान ए उर्दू अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
चैनलों में उर्दू सहाफत के लिए नुमाया काम करने वाले 26 विभूतियों को  मौलवी मोहम्मद बाक़र अवार्ड से सम्मानित किया गया जिसमें जाबिर जवरासी जीलानी ख़ान अलीग मरहूम वक़ार रिज़वी व मरहूम मोहम्मद अली को सम्मानित किया गया वही मौलाना हसरत मोहानी अवार्ड से आरिफ निगरामी गफ़रान नसीम शकील रिज़वी अली ताहिर रिज़वी असद रिज़वी ज़ुबैर अहमद मो0 मेंहदी उर्फी सरवर हुसैन सालेहा रिज़वी अतहर के साथ कई विभूतियों को अवार्ड से सम्मानित किया वही अवध के पहले फोटोग्राफर के नाम पर अहमद अली ख़ान अवार्ड से आज़म हुसैन मोहम्मद अतहर रज़ा नजमुल हसन नदीम जाफर व सज्जाद बाक़र को सम्मानित किया गया।
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