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नीतीश के हाथो से फिसल रहा है बिहार!

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नीतीश के हाथो से फिसल रहा है बिहार!

इण्डिया Live:पटना के पारस अस्पताल में एक बहुत ही चिंताजनक घटना हुई। वहाँ अचानक पांच अपराधी हथियार लेकर पहुंचे और एक बंदी को गोली मारकर चले गए। यह घटना इतनी गंभीर है कि लोग हैरान हैं कि अस्पताल जैसे जगह पर कैसे इतनी बेखौफ बर्बरता हो सकती है। खास बात ये है कि ये खबर उसी दिन आई, जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा ऐलान किया कि वे अब 125 यूनिट तक बिजली फ्री देंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि इन दोनों बातों का आपस में क्या संबंध? दरअसल, इन दोनों घटनाओं के बीच बिहार की राजनीति का बड़ा सवाल छिपा है। पिछले कई सालों से नीतीश कुमार ने हमेशा बिजली फ्री देने के खिलाफ राय जताई थी। वे कहते थे कि इससे राज्य का बजट बिगड़ेगा और बिजली वितरण व्यवस्था पर असर पड़ेगा। लेकिन अचानक 12 जुलाई को उन्होंने मुफ्त बिजली देने का एलान कर दिया।

ये फैसला चुनावी राजनीति से जुड़ा हो सकता है। बिहार में अगले साल चुनाव होने हैं और मुफ्त बिजली का वादा जनता को लुभाने का एक तरीका माना जा रहा है। मुफ्त बिजली की वजह से गरीब परिवारों को राहत मिलेगी और नीतीश को वोट मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

लेकिन यही फैसला 12 जुलाई को अखबारों में छपने के बाद वित्त विभाग ने तुरंत बयान जारी किया कि “मुफ्त बिजली देने का कोई प्रस्ताव अभी तक नहीं आया है और न ही इस पर कोई फैसला हुआ है।” इस बयान से साफ हो गया कि सरकार के अंदर भी इस फैसले को लेकर असहमति है या कम से कम सही योजना अभी नहीं बनी है।

इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फिर से अपना एलान दोहराया और जोर देकर कहा कि 125 यूनिट तक बिजली फ्री दी जाएगी। यह दिखाता है कि सरकार जनता को यह भरोसा दिलाना चाहती है कि उनका वादा कायम है, चाहे अंदर की राजनीति कैसी भी हो।

अब सवाल उठता है कि क्या बिहार में उनकी पकड़ कमजोर पड़ रही है? पारस अस्पताल में हुई गोलीकांड जैसी घटनाएं और लगातार बढ़ता अपराध इस बात का सबूत हो सकती हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था पर नियंत्रण कम होता जा रहा है।

जब साथ ही साथ विपक्ष और आम जनता के बीच भी यह चर्चा है कि मुफ्त बिजली का वादा सिर्फ चुनावी स्टंट है, जिसका असर राज्य के बजट और विकास पर खराब पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, ये सारी घटनाएं और फैसले यह संकेत देते हैं कि बिहार की राजनीति में तेजी से बदलाव आ रहे हैं और नीतीश कुमार की साख और पकड़ दोनों पर सवाल उठने लगे हैं। जनता भी इन बड़े-बड़े वादों और बढ़ती हिंसा को लेकर चिंता में है।

अब देखना ये होगा कि सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है और क्या मुफ्त बिजली का वादा सच में जनता के लिए फायदेमंद होगा या सिर्फ चुनावी खेल का हिस्सा रहेगा।

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