
नाज़िया इलाही खान के बयान पर मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी का तीखा पलटवार, कहा— मुहर्रम और अज़ादारी पर सवाल उठाना करोड़ों भारतीयों की आस्था का अपमान
नाज़िया इलाही खान के बयान पर मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी का तीखा पलटवार, कहा— मुहर्रम और अज़ादारी पर सवाल उठाना करोड़ों भारतीयों की आस्था का अपमान
LUCKNOW LIVE; प्रख्यात शिया इस्लामी विद्वान एवं वक्ता मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने मुहर्रम, ताज़ियादारी और अज़ादारी को लेकर नाज़िया इलाही खान द्वारा दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी धार्मिक परंपरा को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।

जारी बयान में मौलाना ज़ैदी ने कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सत्य, न्याय, मानवता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की वैश्विक पहचान है। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी याद में आयोजित होने वाली अज़ादारी को संकीर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण से देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा, “भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म और धार्मिक परंपराओं का पालन करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। यदि कहीं कोई कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला सामने आता है तो उसके लिए कानून और प्रशासन मौजूद है, लेकिन किसी एक घटना को आधार बनाकर मुहर्रम, ताज़ियादारी और अज़ादारी जैसी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं को कटघरे में खड़ा करना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है।”
उन्होंने कहा कि मुहर्रम के जुलूस और मजलिसें भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, जिनका इतिहास सैकड़ों वर्षों पुराना है। इन आयोजनों के माध्यम से त्याग, बलिदान, इंसाफ़ और मानवता का संदेश समाज तक पहुंचता है।
मौलाना ज़ैदी ने आगे कहा कि कुछ लोग मीडिया की सुर्खियां बटोरने और समाज में अनावश्यक ध्रुवीकरण पैदा करने के उद्देश्य से ऐसे बयान देते हैं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए सभी वर्गों को जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मुहर्रम के अवसर पर शांति, सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए तथा ऐसे बयानों पर भी गंभीरता से संज्ञान लिया जाए जो समाज में वैमनस्य और तनाव पैदा कर सकते हैं।
अंत में मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने कहा कि अज़ादारान-ए-हुसैन हमेशा कानून, संविधान और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं तथा भविष्य में भी देश में भाईचारे, शांति और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाते रहेंगे।