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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर बीबीएयू में ‘भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर बीबीएयू में ‘भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2025’ के अवसर पर विश्वविद्यालय एवं नेशनल पब्लिक स्कूल, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में ‘परंपरा से रूपांतरण तक भारतीय शिक्षा की पुनर्कल्पना — राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती एवं राष्ट्रीय शिक्षा दिवस को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा उपस्थित रहे। मंच पर दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर के पूर्व प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. विनोद सोलंकी, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही, प्रो. हरिशंकर सिंह, नेशनल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. अर्चना सिंह तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुभाष मिश्रा भी उपस्थित थे।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। विश्वविद्यालय कुलगीत के पश्चात अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट कर किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही ने स्वागत भाषण दिया, जबकि कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुभाष मिश्रा ने आयोजन के उद्देश्य और रूपरेखा पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. शिखा तिवारी ने किया।अपने संबोधन में बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए देश को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और हमें 2047 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाकर 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्व की लगभग 20 प्रतिशत युवा शक्ति है, और यदि यही युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा में लगाएंगे, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। प्रो. मित्तल ने कहा कि समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए हमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘विश्व कल्याण’ जैसे भारतीय आदर्शों को जीवन में उतारना होगा।मुख्य अतिथि प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) हजारों शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के व्यापक परामर्श का परिणाम है। यह नीति विद्यार्थियों की क्षमता विकास, सृजनात्मकता और समग्र व्यक्तित्व निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रो. तनेजा ने बताया कि NEP 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा की आवश्यकताओं से जोड़ती है और शिक्षक प्रशिक्षण व अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष बल देती है।प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. विनोद सोलंकी ने अपने उद्बोधन में भारतीय शिक्षा की प्राच्य अवधारणा पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि सनातनी संस्कृति की आध्यात्मिक उन्नति और मानव जागरण का आधार है। उन्होंने वेदों को ज्ञान की अखंड श्रृंखला बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति को उसके सत्य स्वरूप की ओर ले जाने वाली शक्ति है।कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 100 विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से संबंधित विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। अंत में प्रो. हरिशंकर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रॉक्टर प्रो. राम चंद्रा, विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी तथा बीबीएयू और नेशनल पब्लिक स्कूल, लखनऊ के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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