
‘बाबरी’ के लिए चाहिए 300 करोड़, मिले सिर्फ 1.5 करोड़
INDIA LIVE: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अयोध्या के धन्नीपुर गांव में बाबरी मस्जिद के विकल्प के तौर पर बनने वाली ‘मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह मस्जिद’ (अयोध्या मस्जिद) का प्रोजेक्ट वित्तीय संकट और प्रशासनिक अड़चनों के कारण सुस्त पड़ा हुआ है। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ट्रस्ट द्वारा संचालित इस भव्य प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹300 करोड़ तय की गई थी। हालाँकि, ज़मीनी हकीकत यह है कि ट्रस्ट के खाते में अब तक महज 1.5 से 3 करोड़ रुपये का ही चंदा जमा हो सका है।

मुस्लिम समुदाय और दानदाताओं के बीच प्रोजेक्ट के शुरुआती डिजाइन को लेकर असंतोष था। शुरुआत में पेश किया गया आधुनिक (Futuristic) डिजाइन बिना गुंबद और मीनारों के था, जिसे समुदाय ने नकार दिया। बाद में पारंपारिक इंडो-इस्लामिक शैली में नया डिजाइन तैयार कराया गया, जिसमें 5 मीनारें और 1 गुंबद शामिल हैं।

एक ओर जहाँ अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण पूर्ण होकर भव्य रूप ले चुका है, वहीं धन्नीपुर की मस्जिद परियोजना धन के अभाव और प्रशासनिक औपचारिकताओं में उलझी हुई है। ट्रस्ट को उम्मीद है कि नए सिरे से शुरू किए जा रहे जनसंपर्क अभियान और नक्शे की अंतिम मंज़ूरी के बाद निर्माण कार्य में तेज़ी आएगी।