diwali horizontal

उत्तर प्रदेश में 18 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण, गोवंश संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा नया आयाम

0 60

उत्तर प्रदेश में 18 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण, गोवंश संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा नया आयाम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने आज पशुपालन निदेशालय में आयोजित एक कार्यक्रम में निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु प्रदेश के 13 जनपदों में स्थापित 18 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इन केंद्रों में आजमगढ़ व उन्नाव में तीन-तीन, मिर्जापुर में दो, तथा महराजगंज, ललितपुर, अमेठी, बहराइच, देवरिया, पीलीभीत, अयोध्या, कौशाम्बी, चित्रकूट और सीतापुर में एक-एक गोसंरक्षण केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों की कुल निर्माण लागत 28 करोड़ 82 लाख रुपये है तथा प्रत्येक केंद्र में लगभग 400 गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था की गई है।कार्यक्रम के दौरान धर्मपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशन में प्रदेश में गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन कार्य प्राथमिकता पर संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोआश्रय स्थलों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है तथा गोवंश के भरण-पोषण की व्यवस्था पूरी जिम्मेदारी के साथ सुनिश्चित की जा रही है। मंत्री ने संबंधित जनपदों के विधायकों, ग्राम प्रधानों, मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों एवं केयरटेकरों से संवाद कर गोवंश की देखभाल और संरक्षण में सहयोग की अपील की।उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मण्डलों में 18 मॉडल गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। गोआश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने के लिए विभाग द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें गोबर से दीप, धूपबत्ती, गोलॉग, गमले, वर्मी कम्पोस्ट और सीबीजी उत्पादन इकाइयों की स्थापना शामिल है। इन इकाइयों के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सराहनीय है। मंत्री ने कहा कि इन गतिविधियों से न केवल गोवंश संरक्षण को बल मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक उन्नति के अवसर भी बढ़ रहे हैं।उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अब तक 576 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों को स्वीकृति प्रदान कर चुकी है, जिनमें से 421 का निर्माण पूरा हो चुका है और 403 केंद्र पहले से क्रियाशील हैं। प्रत्येक केंद्र की लागत 160.12 लाख रुपये है तथा क्षमता 400 गोवंश की है। निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण हेतु अनुदान राशि का शत-प्रतिशत भुगतान डीबीटी के माध्यम से सितम्बर 2025 तक किया जा चुका है।वर्तमान में प्रदेश भर में 7548 गोआश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 6554 अस्थायी गोआश्रय स्थल, 403 वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 284 कांजी हाउस और शहरी क्षेत्रों के 307 कान्हा गोआश्रय स्थल शामिल हैं। इन केंद्रों में कुल 12,35,782 निराश्रित गोवंशों का संरक्षण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत 1,14,865 लाभार्थियों को 1,80,925 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं।इस अवसर पर पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोसंरक्षण केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, नियमित निरीक्षण किया जाए और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। कार्यक्रम में विशेष सचिव पशुधन देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. योगेन्द्र सिंह पंवार, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डॉ. मेमपाल सिंह, अपर निदेशक डॉ. संगीता तिवारी, योजनाधिकारी डॉ. पी.के. सिंह तथा संयुक्त निदेशक मुख्यालय सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.