
भारत की नई सैन्य नीति से पाकिस्तान में बढ़ी चिंता, CISS ने दी ‘क्षेत्रीय अस्थिरता’ की चेतावनी
भारत की आतंकवाद विरोधी नई सैन्य नीति ने पाकिस्तान में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज (CISS) ने रविवार को दावा किया कि भारत की “न्यू नॉर्मल” मिलिट्री डॉक्ट्रिन दक्षिण एशिया की परमाणु स्थिरता को चुनौती देने वाली रणनीति है। थिंक टैंक का कहना है कि यह सिद्धांत भविष्य में किसी भी संकट के दौरान तनाव को बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है।
एकतरफा सैन्य कार्रवाई की आशंका?
पाकिस्तानी अख़बार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, यह आकलन CISS ने ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों और विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर पेश किया है। CISS के मुताबिक, भारत “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई” के नाम पर पाकिस्तान के खिलाफ एकतरफा सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिसर्च इंस्टीट्यूट का दावा है कि 2019 से यह नीति भारत की सैन्य रणनीति का मुख्य हिस्सा रही है और अब इसे फिर से लागू किया जा रहा है। CISS ने कहा कि भारत सीमा पार हमलों के जवाब में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ जैसे पारंपरिक हमले करने की ओर बढ़ रहा है, और यह संकेत देता है कि भविष्य में भारत पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की परवाह किए बिना कार्रवाई कर सकता है।
“भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर डिटरेंट से नहीं घबराएगा”
CISS ने चेतावनी देते हुए कहा कि परमाणु हथियार वाले देश पर पक्की सैन्य जवाबी कार्रवाई को संस्थागत करना असल में अस्थिरता पैदा करने वाला कदम है। उनका तर्क है कि भारत अपनी पारंपरिक सैन्य बढ़त का उपयोग करके “लिमिटेड वॉर स्ट्रेटेजी” की तरफ बढ़ रहा है, जिससे गलत अनुमान और बड़ा सैन्य टकराव संभव है।
भारत के सैन्य आधुनिकीकरण पर पश्चिम को घेरा
CISS ने पश्चिमी देशों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी भारत का सैन्य आधुनिकीकरण इसलिए कर रहे हैं कि भारत चीन का मुकाबला कर सके। लेकिन उनके अनुसार, भारत द्वारा विकसित की जा रही क्षमताएं अधिकतर पाकिस्तान केंद्रित हैं।
थिंक टैंक का दावा है कि पश्चिम भारत-चीन प्रतिद्वंद्विता को प्राथमिक मान रहा है, जबकि भारत के सैन्य आधुनिकीकरण का बड़ा उद्देश्य पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए विकसित रणनीति है।
