
लखनऊ में असमिया समुदाय को जगह खाली करने का नोटिस, ‘बांग्लादेशी’ बताए जाने पर राजनीतिक विवाद तेज
लखनऊ में गुडंबा थाना क्षेत्र के फूलबाग में रह रहे असमिया समुदाय के लोगों को मेयर सुषमा खर्कवाल द्वारा 15 दिनों में जगह खाली करने का निर्देश देने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मेयर ने उन्हें ‘बांग्लादेशी’ या ‘रोहिंगिया’ कहकर संबोधित किया, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
कांग्रेस का आरोप—भारतीय नागरिकों को बताया विदेशी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर कहा कि असम भारत का हिस्सा है, इसलिए असमिया लोग भारतीय नागरिक हैं। उन्हें ‘बांग्लादेशी’ कहना उनकी नागरिकता पर सीधा सवाल उठाता है। उन्होंने मांग की कि मेयर सुषमा खर्कवाल इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
कांग्रेस के शहर अध्यक्ष डॉ. शहजाद आलम ने बस्ती का दौरा कर दावा किया कि समुदाय के पास असम के बारपेटा और गोलपाड़ा जिलों की नागरिकता साबित करने वाले सभी दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें NRC दस्तावेज भी शामिल हैं। कांग्रेस ने मांग की कि असमिया लोगों को हटाने की कार्रवाई तुरंत रोकी जाए और पुलिस व नगर निगम द्वारा जब्त किए गए उनके ठेले वापस किए जाएं।
राजनीतिक तनाव में बढ़ोतरी
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश सिंह ने आरोप लगाया कि मेयर बंगला बोलने वालों को विदेशी दिखाने के दबाव में भारतीय नागरिकों को ही निशाना बना रही हैं।
शाहनवाज आलम ने चेतावनी दी कि अगर असमिया बोलने वाले लोगों को यूपी से निकालने का प्रयास हुआ तो असम में उल्फा जैसे संगठन हिंदी भाषी नागरिकों के खिलाफ हिंसा फैला सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी भाजपा सरकार पर होगी।
पीड़ितों का दर्द — “पुलिस ने ठेले तोड़ दिए, धमकाया”
समुदाय के पीड़ितों ने बताया कि मेयर के साथ आई पुलिस ने उनके ठेले तोड़ दिए और 15 दिन के भीतर लखनऊ छोड़ने का दबाव बनाया, जबकि वे निजी प्लॉट पर किराया देकर रह रहे हैं।
18 वर्षों से सफाई कर्मी का काम कर रहे इम्तियाज और 15 साल से रह रहे अलीमुद्दीन ने कहा कि उन्हें अचानक विदेशी बताकर बेघर करने की धमकी दी गई है।
